Ritibadh kavi aur unki rchnayen pdf

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जिन कवियों नें शास्त्रीय ढंग पर लक्षण उदाहरण प्रस्तुत कर अपने ग्रंथों की रचना किया उन्हें रीतिबद्ध श्रेणी में रखा गया है। हिन्दी के प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्न हैं|

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मतिरामकाजन्म 1604 ई. औरमृत्यु 1701 ई. मेंहुआथा।येचिंतामणिऔरभूषणकेभाईथे।इनकेग्रन्थोंकाविवरणनिम्नलिखितहै-

No.-1. ग्रंथ        वर्ष (ई.)  विषयवस्तु            आश्रयदाता

No.-2. फूलमंजरी            1619       60 दोहोंमेंकिसीएकफूलकावर्णन     जहांगीर

No.-3.रसराज    1663       श्रृंगाररसनिरूपण, नायक-नायिकाभेद          स्वतंत्ररूपसे

No.-4.ललितललाम         1664       अलंकारनिरूपण भावसिंहहाडा

No.-5.सतसई     1681       बिहारीसतसईकाअनुकरण               भोगनाथ

No.-6.अलंकारपंचशिका 1690       अलंकारनिरूपण ज्ञानचंद

No.-7.वृत्तिकौमुदी/  छंदसार        1701       छंदोंकानिरूपण   स्वरूपसिंहबुंदेला

No.-8.लक्षणश्रृंगार            –             –             –

No.-9.साहित्यसार            –             नायिकाभेदनिरूपण           –

No.-10.मतिरामसतसई  –             –             भोगनाथ

No.-11.मतिरामकीरचनाएँ

No.-12.मतिरामकाप्रथमग्रंथ ‘फूलमंजरी’है।किन्तुडॉ. बच्चनसिंहने ‘रसराज’कोहीप्रथमग्रंथमानाहै।इन्होंने ‘फूलमंजरी’कीरचनाजहाँगीरकीआज्ञापरआगरामेंलिखाथा।

No.-13.इसग्रंथकेप्रत्येकदोहेमेंएकफूलकानामहैजिसकेश्लेषार्थसेनायिकाकासंकेतमिलताहै।

No.-14.रसराजमेंश्रृंगारएवंनायिकाभेदकाविवेचनभानुदत्तकी ‘रसमंजरी’औररहीमके ‘बरवैनायिकाभेद’केआधारपरकियागयाहै।इनकासर्वाधिकप्रसिद्धग्रंथ ‘रसराज’और ‘ललितललाम’हैं।

No.-15.जिसकेबारेमेंशुक्लजीनेलिखाकी- “रसऔरअलंकारकीशिक्षामेंइनकाउपयोगबराबरचलताआयाहै।”शुक्लने ‘वृत्तकौमुदी’या ‘छंदसार’कोमहाराजशंभुनाथसोलंकीकेलिएलिखागयामानाहै |

No.-16.जबकियहग्रंथस्वरूपसिंहबुंदेलाकेआश्रयमेंलिखागयाहै।शुक्लकेअनुसार, “रीतिकालकेप्रतिनिधिकवियोंमेंपद्माकरकोछोड़औरकिसीकविमेंमतिरामकीसीचलतीभाषाऔरसरलव्यंजनानहींमिलतीहै।उनकीभाषामेंनादसौंदर्यविद्यमानहै।”

मतिरामपरलिखेगयेप्रमुखग्रंथ

No.-1.मतिरामकासर्वप्रथमविस्तृतजीवनपरिचयदेनेवालाग्रंथ ‘हिंदीनवरत्न’है, जिसकामुख्यआधार ‘शिवसिंहसरोज’है।

ग्रंथ         लेखक

No.-1.हिंदीनवरत्न           मिश्रबंधु

No.-2.मतिरामग्रन्थावली               कृष्णबिहारीमिश्र

No.-3.मतिराम: कविऔरआचार्य  महेंद्रकुमार

No.-4.महाकाव्यमतिराम               त्रिभुवनसिंह

No.-5.मतिरामपरलिखेगयेग्रंथ

No.-6.जसवंतसिंह

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जसवंतसिंहहिन्दीसाहित्यकेप्रधानयाशिक्षककेरूपमेंप्रसिद्धहैं।इनकेग्रन्थोंकाविवरणनिम्नलिखितहै-

No.-1.ग्रंथ           विषयवस्तु

No.-2.भाषाभूषण              212 दोहेमेंअलंकारोंकानिरूपण

No.-3.प्रबोधचंद्रोदय         संस्कृतनाटकप्रबोधचंद्रोदयकाब्रजभाषामेंपद्यानुवाद

No.-4.अपरोक्षसिद्धान्त,

No.-5.अनुभवप्रकाश,

No.-6.आनन्दविलास,

No.-7.सिद्धान्तबोध,

No.-8.सिद्धान्तसार

No.-9.इनग्रंथोंमेंवेदान्तविषयकानिरूपणहुआहै।

जसवंतसिंहकीरचनाएँ

No.-1.सुखदेवमिश्र

सुखदेवमिश्रकीप्रमुखरचनाएँनिम्नांकितहैं-

No.-1.वृत्तविचार (1671 ई.), 2. छंदविचार, 3. फाजिलअलीप्रकाश, 4. यार्णव, 5. श्रृंगारलता, 6. अध्यात्मप्रकाश (1698 ई.), 7. दशरथराय

No.-2.सुखदेवमिश्रकेसन्दर्भमेंशुक्लनेलिखाहै, “छंदशास्त्रपरइनकासाविशदनिरूपणऔरकिसीकविनेनहींकियाहै।”सुखदेवमिश्रकोराजाराजसिंहगौड़ने ‘कविराज’कीउपाधिदीथी।

तोष

No.-1.तोषरसवादीहै।इनकामूलनामतोषनिधिहै।इनकीप्रमुखकृतियांहैं-

No.-2.सुधानिधि (1634 ई.), 2. नखशिख, 3. विनयशतक

कुलपतिमिश्र

No.-1.कुलपतिमिश्रबिहारीकेभांजेथे।इनकाजन्मआगरामेंहुआथा।इनकेआश्रयदाताजयपुरकेराजारामसिंहथे।कलपतिमिश्ररसध्वनिवादीथे।येप्रसिद्धकविबिहारीलालकेभांजेथे।कुलपतिमिश्रकाकविताकाल 1667 ई. से 1686 ई. तकमानाजाताहै।इनकीप्रमुखकृतियाँनिम्नहैं-

ग्रंथ         वर्ष (ई.)  विषयवस्तु

No.-1.रसरहस्य 1670       मम्मटकेरसरहस्यकाछायानुवाद

No.-2.द्रोणपर्व    1680       महाभारतकेद्रोणपर्वकापद्यबद्धअनुवाद

No.-3.युक्तितरंगिणी (अप्राप्य)    1686       –

No.-4.नखशिख (अप्राप्य)              –             –

No.-5.संग्रामसार               –             –

No.-6.दुर्गाभक्तिचन्द्रिका              –             नगेन्द्रकेअनुसार

No.-7.कुलपतिमिश्रकीरचनाएँ

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देव

No.-1.देवकामूलनामदेवदत्तथा।येइटावा (उ. प्र.) केरहनेवालेथे।इनकाजन्म 1673 ई. औरमृत्यु 1767 ई. मेंहुआथा।देवहितहरिवंशकेअनन्यसम्प्रदायमेंदीक्षितथे।

No.-2.देवजीवकोपार्जनकेलिएअनेकराजाओंऔरनवाबोंकेयहाँभटकतेरहेपरकहींजमनसके।देवसर्वप्रथमऔरंगजेबकेबेटेआजमशाहकेआश्रयमेंरहे।

No.-3.रीतिकालकेकवियोंमेंएकमात्रकविदेवहैंजोनिर्गुणभक्तोंकीतरहजाति-पांतिऔरऊँच-नीचकाविरोधउसीअक्खड़ताकेसाथकियाहै।इनकेकाव्यकामूलविषयश्रृंगारहै।

No.-4.येआचार्यऔरकविदोनोंरूपमेंप्रसिद्धहैं।देवकेरीति-विवेचनकाप्रमुखदोष- रीतिनिरूपणमेंअव्यवस्था, अशास्त्रीयताएवंअसामंजस्यहै।

No.-5.देवके 72 ग्रंथबतायेजातेहैं, रामचंद्रशुक्लभीइनके 23 ग्रंथोंकाजिक्रहिंदीसाहित्यकेइतिहासमेंकियाहैपरंतुवर्तमानमें 15 हीउपलब्धहैं।

No.-6.सर्वप्रथमशिवसिंहसेंगरनेदेवकीरचनाओंकीसंख्या 72 बतायीहै।कुछविद्वानोंने 52 ग्रन्थोंकाउल्लेखकियाहै।

देवकीप्रमुखरचनाएँनिम्नांकितहैं-

ग्रंथ         विषयवस्तु / आधार

No.-1.भावविलास (1689 ई.)          रसएवंनायक-नायिकाभेदकावर्णनहुआहै।

No.-2.अष्टयाम                आठपहरोंकेबीचहोनेवालेनायक-नायिकाकेविविधविलासोंकावर्णनहै।देवनेइसग्रंथकोअजयशाहूकोसुनायाथा

No.-3.कुशलविलास         कुशलसिंहकेनामपरआधारितहै

No.-4.भवानीविलास        भवानीदत्तवैश्यकोसमर्पितहै

No.-5.जातिविलास          अपनीयात्राकाअनुभव, विभिन्नजातिएवंप्रदेशोंकीस्त्रियोंकावर्णनकियाहै

No.-6.रसविलास               राजाभोगीलालकोसमर्पितरचनाहै, उन्हींकेआश्रयमेंलिखागयाहै

No.-7.रागरत्नाकर           राग-रागिनियोंकेस्वरूपकावर्णन (संगीतविषयकलक्षणग्रंथ)

No.-8.देवचरित कृष्णकेजीवनपरआधारितप्रबंधकाव्य

No.-9.देवमायाप्रपंच         संस्कृतनाटकप्रबोधचंद्रोदयकापद्यानुवाद (कृष्णकेजीवनसेसंबंधितनाटक)

No.-10.देवशतक              अध्यात्मसम्बन्धीग्रंथहैजिसमेंजीवन-जगतसंबंधीअसारताकाचित्रणहुआहै

No.-11.प्रेमचंद्रिका           राजाउद्योतसिंहकोसमर्पित

No.-12.शब्द (काव्य) रसायन        लक्षणतथासर्वांगनिरूपकरीतिग्रंथहै, शब्दशक्ति, रसादिकावर्णनहुआहै

No.-13.सुखसागरतरंग   देवकेअनेकग्रन्थोंसेलिएहुएकवित्त-सवैयाकासंग्रह।अलीअकबरखांकेआश्रयमेंलिखागया

No.-14.सुजानविनोद      सुजानमणिकेआश्रयमेंलिखागया

No.-15.प्रेमतरंग               इसमेंप्रेमकेमहात्म्यकावर्णनकियागयाहै

देवकीरचनाएँ

रामचंद्रशुक्लदेवकीकुछअन्यकृतियाँभीबतायीहैंजोनिम्नहैं-

No.-1.1. वृक्षविलास, 2. पावसविलास, 3. ब्रह्मदर्शनपचीसी, 4. तत्त्वदर्शनपचीसी, 5. आत्मदर्शनपचीसी, 6. जगदर्शनपचीसी, 7. रसानंदलहरी 8. प्रेमदीपिका, 9. नखशिख, 10. प्रेमदर्शन

No.-2.इनकाप्रथमग्रंथ ‘भावविलास’है। ‘सुखसागरतरंग’कासम्पादनमिश्रबन्धुओंकेपिता ‘बालदत्तमिश्र’नेसन् 1897 ई. मेंकिया।नगेन्द्रने ‘सुखसागरतरंग’कोनायिकाभेदका ‘विश्वकोश’मानाहै।देवकाअंतिमलक्षणग्रंथ ‘सुखसागरतरंग’है। ‘शब्द (काव्य) रसायन’देवकासर्वांगनिरूपकग्रंथहै, जो 11 प्रकाशोंमेंविभक्तहै।

No.-3.रामस्वरूपचतुर्वेदीने ‘मध्यकालीनहिन्दीकाव्यभाषा’पुस्तकमेंलिखाहै- देवकीध्वनि-संवेदनशीलतारीतिकालीनकाव्यभाषामेंअप्रतिमहै।’विश्वनाथत्रिपाठीकेअनुसार ‘देवमेंउत्कृष्टबिम्बविधानपायाजाताहै।रामचंद्रशुक्लनेलिखाहैकि, “रीतिकालकेकवियोंमेंयेबड़ेहीप्रगल्भऔरप्रतिभासम्पन्नकविथे।”

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रसलीन

No.-1.रसलीनकामूलनामगुलामनबीथा।येमीरतुफैलअहमदकेशिष्यथे।इनकीप्रमुखकृतियाँनिम्नहैं-

No.-2.ग्रंथ           वर्ष (ई.)  विषयनिरूपण

No.-3.अंगदर्पण 1737       1741 दोहोंकासंग्रह (शुक्लकेअनुसार 1154)नायक-नायिकाभेद, अंगोंकाउपमाऔरउत्प्रेक्षासेचमत्कारपूर्णवर्णन

No.-4.रसप्रबोध 1741       1155 दोहेमेंरसोंकावर्णन

No.-5.रसलीनकीरचनाएँ

No.-6.भिखारीदास

No.-7.भिखारीदासकारचनाकाल 1728-1750 ई. तकमानाजाताहै।भिखारीदासरीतिकालकेपहलेआचार्यहैंजिन्होंनेसर्वप्रथमकाव्यपरम्परा, भाषा, छंदऔरतुकआदिपरविचारकिया।

भिखारीदासरीतिकालकेअंतिमआचार्यमानेजातेहैं।भिखारीदासकीप्रमुखरचनाएँनिम्नहैं-

ग्रंथ         वर्ष (ई.)  विषयनिरूपण

No.-1.नामकोश 1738       कोशग्रंथ

No.-2.रससारांश                1742       रसकेभेदोपभेदोंकावर्णन

No.-3.छंदार्णवपिंगल       1742       छंदोंकाविस्तृतवर्णन

No.-4.काव्यनिर्णय           1746       काव्यकेभेदोपभेदोंकावर्णन

No.-5.श्रृंगारनिर्णय           1750       नायकनायिकाभेदवर्णन

No.-6.विष्णुपुराणभाषा   –             विष्णुपुराणकादोहा-चौपाईशैलीमेंअनुवाद

No.-7.शतरंजशतिका       –             शतरंजखेलनेकेतौरतरीकोंकावर्णन

No.-8.अमरकोश               –             संस्कृतकेअमरकोशकापद्यानुवाद

भिखारीदासकीरचनाएँ

No.-1.रीतिकालकानामकरणऔरविभाजन

No.-2.रीतिसिद्धकाव्यधाराकेकविऔरउनकीरचनाएँ

No.-3.रीतिमुक्तकाव्यधाराकेकविऔरउनकीरचनाएँ

No.-4.रीतिकालीनमुक्तकएवंप्रबंधकाव्यतथाअलंकार, छंद, रसएवंकाव्यांगनिरूपकग्रंथ

पद्माकर

No.-1.पद्माकरकाजन्मबाँदामें 1753 ई. औरमृत्यु 1833 ई. मेंहुआथा।पद्माकररीतिकालकेअंतिमश्रेष्ठकविमानेजातेहैं।विश्वनाथत्रिपाठीनेलिखाहैकि, ‘बिहारीरीतिकालकेप्रारम्भिकश्रेष्ठकविहैंतोपद्माकरअंतिम।

No.-2.पद्माकरजयपुरनरेशप्रतापसिंहकेदरबारमेंमेंरहे, उन्होंनेपद्माकरको ‘कविराजशिरोमणि’कीउपाधिदी।महाराजाप्रतापसिंहकेपुत्रजगतसिंहकेसंरक्षणमेंरहकरपद्माकरने ‘जगद्विनोद’और ‘पद्मभारण’कीरचनाकिया।

No.-3.जगतसिंहकीमृत्युकेबादयेग्वालियरकेमहाराजदौलतरावसिंधियाकेदरबारमेंभीरहे।ग्वालियरमेंरहकरइन्होंने ‘हितोपदेश’काअनुवादकिया।इनकीप्रमुखरचनाएँनिम्नांकितहैं-

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ग्रंथ         विषयनिरूपण

प्रबन्धकाव्य        

No.-1.हिम्मतबहादुरविरुदावली   211 छंदोंमेंहिम्मतबहादुरकाशौर्यवर्णन

No.-2.मुक्तककाव्य

No.-3.पद्माभरण                अलंकारोंतथानवरसोंकाविवेचन

No.-4.जगद्विनोद (1811 ई.)         नायक-नायिकाभेद, 6 प्रकरणएवं 731 छंदोंमेंनवरसोंकाविवेचन

No.-5.प्रबोधपचासा          भक्तिएवंवैराग्यनिरूपण

No.-6.गंगालहरी                संस्कृतकविजगन्नाथकृत ‘गंगालहरी’कापद्यानुवाद

No.-7.प्रतापसिंहविरुदावली           117 छन्दोंमेंप्रतापसिंहकाशौर्यवर्णन (प्रबंधऔरचरितकाव्य)

No.-8.कलिपच्चीसी         कलियुगकावर्णन

No.-9.रामरसायन             वाल्मीकिके ‘रामायण’काछायानुवाद

No.-10.अलीजाहप्रकाश  महाराजग्वालियरकेनामलिखागयाहै

No.-11.नोट- अलीजाहप्रकाशऔरजगद्विनोदमेंकोईखासअंतरदिखाईनहींदेता, कईछंदकुछशब्दांतरकेसाथसमानहीहैं।

पद्माकरकीरचनाएँ

No.-1.पद्माकरभट्टनेहोली, फागऔरत्यौहारोंकावर्णनपूरीतल्लीनताकेसाथकियाहै।इनकेकाव्यमेंबुंदेलखण्डकीप्रकृतिएवंलोकजीवनकाजीवंतचित्रणहुआहै।इनकीभाषापरबुंदेलखंडीकाविशेषप्रभावपड़ाहै।

No.-2.पद्माकरकोहिंदीसाहित्यमेंपचासाशैलीकाप्रवर्तकमानाजाताहै।इनकासर्वाधिकप्रसिद्धग्रंथ ‘जगद्विनोद’और ‘पद्माभरण’हैं।

No.-3.इन्होंने ‘जगद्विनोद’कीरचना 1803 से 1821 ई. केबीचमहाराजजगतसिंहकेआश्रयमेंरहकरकियाथा। ‘जगद्विनोद’ग्रंथमेंपद्माकरनेश्रृंगाररसकेअनुभवों, 8 सात्विकभावों, 12 हावों, 9 रसों, नायक-नायिकाभेद, 3 प्रकारकेदूतिओं, 4 प्रकारकेदर्शन, षड्रऋतुओंआदिकावर्णनकियाहै।

No.-4.रामचंद्रशुक्लइसग्रंथ (जगद्विनोद) कोश्रृंगाररसकासारमानतेहैं।

No.-5.पद्माकरके ‘जगद्विनोद’में 6 प्रकरणऔर 731 छंदहैं। ‘जगद्विनोद’कीरचनाकेलिएआधारसामग्रीभानुदत्तकी ‘रसमंजरी’, केशवदासकी ‘रसिकप्रिया’औरविश्वनाथप्रसादके ‘साहित्यदर्पण’सेलीगईहै।

No.-6.‘पद्माभरण’कीरचनाइन्होंनेजयपुरमेंकियाथा, इसग्रंथमेंइन्होंने 100 अलंकारोंकेलक्षणऔरउदहारणदिएहैं।पद्माकरकेबारेमेंरामचंद्रशुक्लजीनेलिखाहैकी-

No.-7. ‘इनकीभाषामेंवहअनेकरूपताहैजोएकबड़ेकविमेंहोनीचाहिए।भाषाकीऐसीअनेकरूपतागोस्वामीतुलसीदासजीमेंदिखाईदेतीहै।’

No.-8. ‘ऐसासर्वप्रियकविइसकालकेभीतरबिहारीकोछोड़करदूसरानहींहुआहै।’

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