Indus Valley Civilization pdf in Hindi

Indus Valley Civilization pdf in Hindi – सिंधु घाटी सभ्यता

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भारत में सिंधु घाटी सभ्यता पहली नगरीय सभ्यता थी। खुदाई में प्राप्त हुए अवशेषों से पता चलता है कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों की सोच अत्यंत विकसित थी। उन्होंने पक्के मकानों में रहना आरंभ कर दिया था। चूँकि इस सभ्यता का विकास सिंधु नदी व उसकी सहायक नदियों के आस पास के क्षेत्र में हुआ था, इसीलिए इसे ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ का नाम दिया गया है। इस सभ्यता की खुदाई सबसे पहले वर्तमान पाकिस्तान में स्थित ‘हड़प्पा’ नामक स्थल पर हुई थी। अतः इसे ‘हड़प्पा सभ्यता’ भी कहा गया।

Indus Valley Civilization pdf in Hindi – सिंधु घाटी सभ्यता

लोथल

No.-1. हड़प्पा या सिन्धुघाटी सभ्यता का प्रमुख स्थल माना जाने वाला लोथल गुजरात राज्य में खम्भात खाड़ी के पास स्थित है।लोथल नामक इस सिन्धु सभ्यता के स्थल की खुदाई एस. आर. राव ने सन् 1957 में की थी।

No.-2. यहाँ पर गोदीबाड़ा एवं भवन तथा दुकानों के भग्नावशेष से बस्ती होने के प्रमाण मिलते हैं।

No.-3. लोथल में प्राप्त विभिन्न साक्ष्य नगर नियोजनशीलता के व्यवस्थित प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।

रंगपुर

No.-1. सिन्धुघाटी सभ्यता का यह स्थल भादर नदी के किनारे लोथल से लगभग 50 किलोमीटर उत्तर-पूर्व और अहमदाबाद के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।

No.-2. रंगपुर का उत्खनन एस. आर. राव द्वारा सन् 1954 में किया गया।

No.-3. पुरातत्त्ववेत्ताओं के अनुसार लोथल के बाद रंगपुर में हड़प्पा सभ्यता का आविर्भाव हुआ।

No.-4. यहाँ पर उत्खनन से प्राप्त कई अवशेष हड़प्पा सभ्यता के सदृश थे।

No.-5. प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता एस. आर. राव के अनुसार-“रंगपुर की सभ्यता की स्थापना लोथल के बाढ़ पीड़ितों के आकर बस जाने से हुई है।

No.-6. रंगपुर में प्राप्त अवशेष हड़प्पा की हासोन्मुख सभ्यता को प्रदर्शित करते हैं।

रोजदि

No.-1. सिन्धुघाटी सभ्यता का यह स्थल राजकोट से दक्षिण में भादर नदी के किनारे रंगपुर नामक ऐतिहासिक स्थल के निकटस्थ प्रदेश में स्थित है।

No.-2. रोजदि नामक इस स्थल में भयंकर अग्निकाण्ड होने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

No.-3. मकानों के चारों ओर लगी पत्थरों की घेराबन्दी रोजदि के असुरक्षित होने के प्रमाण की पुष्टि करती हैं।

No.-4. इस तरह की घेराबन्दी सिन्धुसभ्यता के किसी भी स्थल में नहीं पाई गई है।

सुरकोटड़ा

No.-1. सिन्धुघाटी सभ्यता का यह स्थल कच्छ जिले में खोजा गया था।

No.-2. इस स्थल पर एक बड़ी चट्टान से ढकी कब्र प्राप्त हुई।

No.-3. सुरकोटड़ा के अधिकतर अवशेष हड़प्पा संस्कृति के अन्य अवशेषों से पूर्ण रूप से मिलते हैं।

No.-4. विभिन्न साक्ष्यों एवं अनुसंधानों के आधार पर स्पष्ट होता है कि सुरकोटड़ा की संस्कृति हड़प्पा संस्कृति का विकसित स्वरूप था।

No.-5. सुरकोटड़ा की सभ्यता रोजदि की सभ्यता से कुछ हद तक साम्यता रखती है।

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मालवण

No.-1. सिन्धुघाटी सभ्यता का यह ऐतिहासिक स्थल ताप्ती नदी के मुहाने पर काठियावाड़ के सूरत जिले में स्थित है।

No.-2. मालवण में प्रमुख व्यापारिक केन्द्र होने के प्रमाण मिले हैं।

No.-3. विभिन्न पुरातत्त्ववेत्ताओं एवं उत्खनन के दौरान पाए गए साक्ष्यों के आधार पर मालवण का सिन्धुघाटी सभ्यता के बन्दरगाह होने के पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

संघोल

No.-1. सिन्धुघाटी सभ्यता का यह स्थल चण्डीगढ़ से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

No.-2. संघोल से प्राप्त अवशेष सिन्धु घाटी सभ्यता के अन्तिम चरण के अवशेष प्रतीत होते हैं।

No.-3. संघोल नामक ऐतिहासिक स्थल से रोपड़ एवं बाड़ा (पंजाब) के समान ही अवशेष मिले हैं।

No.-4. यहाँ से प्राप्त साक्ष्य सिन्धुघाटी सभ्यता के लुप्त होने के समय की पुष्टि करते हैं।

रोपड़

No.-1. सिन्धुपाटी सभ्यता का यह ऐतिहासिक स्थल पंजाब में शिवालिक पहाड़ियों में अवस्थित है।

No.-2. रोपड़ में हड़प्पा सभ्यता के दो चरण प्राप्त हुए हैं।

No.-3. पूर्वोक्त अवशेषों के अतिरिक्त रोपड़ में हड़प्पा स्थल से प्राप्त अवशेषों की तरह ही मिट्टी के बरतन उत्खनन से प्राप्त हुए हैं।

बाड़ा

No.-1. हड़प्पा सभ्यता का यह ऐतिहासिक स्थल पंजाब में रोपड़ के निकट स्थित है।

No.-2. बाड़ा से प्राप्त मिट्टी के बरतन कोटदीजी एवं कालीबंगा के हड़प्पा पूर्व संस्कृति से समानता रखते हैं।

राखीगढ़ी

No.-1. हड़प्पा सभ्यता का यह स्थल जींद के निकटस्थ क्षेत्र में अवस्थित है।

No.-2. यहाँ पर हड़प्पा संस्कृति से पूर्व एवं हड़प्पा संस्कृति के बाद के अवशेष साक्ष्य के रूप में पाए गए हैं।

No.-3. राखीगढ़ी नामक इस ऐतिहासिक स्थल में उत्खनन के दौरान एक ‘मुहर’ प्राप्त हुई थी।

No.-4. यहाँ से प्राप्त मुहर लिपिवद्ध थी, लेकिन अज्ञातलिपि होने के कारण इसे पढ़ा जाना सम्भव नहीं हो सका।

वणवाली

No.-1. सिन्धु सभ्यता का यह ऐतिहासिक स्थल हरियाणा राज्य के हिसार जिले में स्थित है।

No.-2. आर. एस. विष्ट द्वारा वणवाली नामक इस स्थल की खुदाई सन् 1973-74 में कराई गई।

No.-3. वणवाली में सुरक्षा के लिए घेराबन्दी, किलाबन्दी एवं हड़प्या संस्कृति के नागरिक स्वरूप के पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त हुए।

Indus Valley Civilization in Hindi – सिंधु घाटी सभ्यता

आलमगीरपुर

No.-1. सिन्धु सभ्यता का यह स्थल मेरठ (उ.प्र.) के निकट हिन्डन नदी के किनारे पर अवस्थित है।

No.-2. सिन्धु सभ्यता के गंगा-यमुना दोआब में पाया जाने वाला यह अपनी किस्म का पहला स्थल है।

No.-3. यहाँ पर खुदाई के दौरान मिट्टी के बरतन, आभूषण एवं मिट्टी से बनी मकान की दीवारें खोजी गई हैं।

No.-4. उत्खनन से आलमगीरपुर में प्राप्त अवशेष हड़प्पा संस्कृति के पतनोन्मुख साक्ष्यों को प्रदर्शित करते हैं।

कालीबंगा

No.-1. सिन्धुघाटी सभ्यता का यह ऐतिहासिक स्थल राजस्थान राज्य के गंगानगर जिले में स्थित है।

No.-2. कालीबंगा घग्घर नदी के किनारे पर स्थित है।

No.-3. पुरातत्त्वविदों का मानना है कि कालीबंगा, गंगानगर व हनुमानगढ़ दोनों की सीमा पर होने के कारण कालीबंगा की स्थिति कई पुस्तकों में हनुमानगढ़ भी बताई जाती है।

No.-4. ‘हड़प्पा और मोहनजोदड़ो’ के बाद सैन्धव साम्राज्य की तीसरी राजधानी थी।

No.-5. कालीबंगा में उत्खनन से लकडी की नालियाँ प्राप्त हुई हैं, जो अन्यत्र कहीं भी नहीं खोजी गई हैं।

No.-6. यहाँ से प्राप्त आभूषण, उपकरण, हथियार एवं अन्य सामग्री पूर्णतः हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो से मिलती हुई थी।

No.-7.  कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ-‘काली चूड़ियाँ’ होता है।

No.-8. कालीबंगा में मातृदेवी की आकृतियाँ या मूर्तियाँ प्राप्त नहीं हुई हैं।

No.-9. ऐसा किसी स्थल पर नहीं हुआ।

No.-10. कालीबंगा सिन्धुसभ्यता का आयताकार नगर है जो प्राक़ हड़प्पाकालीन संस्कृति के साक्ष्यों का परिचायक है।

No.-11. सिन्धु सभ्यता का यह सबसे विशिष्ट स्थल है।

बड़गाँव और अम्बखेड़ी

No.-1. सिन्धु सभ्यता के ये दोनों स्थल उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर जिले में यमुना की सहायक नदी मस्करा के तट पर स्थित है।

No.-2. बड़गाँव एवं अम्बखेड़ी ऐसे सिन्धु सभ्यता के स्थल हैं जो कुछ वर्षों पूर्व उत्खनन से प्राप्त हुए हैं।

No.-3. खुदाई के दौरान प्राप्त होने वाले अवशेष हड़प्पा संस्कृति से पर्याप्त साम्यता रखते हैं।

No.-4. यहाँ पर नागरिक व्यवस्था से सम्बन्धित कोई भी प्रमाण दृष्टिगत नहीं हुए हैं।

मीत्ताथल

No.-1. मीत्ताथल हरियाणा राज्य के भिवानी नामक स्थान पर खोजा गया सिन्धु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख स्थल है।

No.-2. इस स्थल से हड़प्पा संस्कृति के पतनोन्मूख एवं विकासशील संस्कृति के प्रमाण प्राप्त हुए हैं।

No.-3. यहाँ पर दो बार उत्खनन हुआ है।

No.-4. मीत्ताथल से प्रथम उत्खनन में सिन्धु सभ्यता के विकसित स्वरूप एवं द्वितीय उत्खनन में हासोन्मुख सभ्यता के साक्ष्य अवशेष के रूप में प्राप्त हुए हैं।

सिन्धु सभ्यता का काल निर्धारण

No.-1. हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो में उत्खनन के दौरान प्राप्त सप्तस्तरीय भग्नावशेषों को आधार मानकर परातत्ववेत्ताओं ने सिन्धु सभ्यता का कालक्रम 3250 से 2750 ई. पू. निर्धारित किया है।

No.-2. प्रसिद्ध विद्वान् एच. हेरास ने नक्षत्रीय आधार पर सिन्धु घाटी सभ्यता का कालक्रम 5600 ई. पू. निर्धारित किया है, जबकि पुरातत्त्ववेत्ता सी. एल. फाक्टी ने सिन्धुघाटी सभ्यता का कालक्रम 2800 से 2500 ई.पू. निश्चित किया है।

Indus Valley Civilization  – सिंधु घाटी सभ्यता

No.-3. सर मार्टिमर हीलर के अनुसार सिन्धु घाटी सभ्यता का कालक्रम 2500-1500 ई.पू. आँका है।

No.-4. मार्शल नामक पुरातत्ववेत्ता सिन्धुघाटी सभ्यता का विकास तीसरी सहस्त्राब्दी ई. पू. हुआ मानते हैं।

No.-5. आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति (C-14) के अनुसार सिन्धुघाटी सभ्यता का काल 2300-1750 ई.पू. के मध्य निर्धारित किया है।

No.-6. 1750 ई. पू. तक यद्यपि हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता नष्ट हो चुकी थी, लेकिन अन्य स्थलों पर इस काल में हासोन्मुख सभ्यता विद्यमान थी।

No.-7. यहाँ पर दृष्टव्य है कि सिन्धुघाटी सभ्यता के ऐतिहासिक स्थल रंगपुर (गुजरात) में 800 ई. पू. भी सभ्यता के साक्ष्य विद्यमान थे।

No.-8. विभिन्न उत्खननों, विद्वानों, पुरातत्त्ववेत्ताओं एवं आधुनिक अनुसंधानों के आधार पर हड़प्पा संस्कृति के पूर्णकाल को निम्नलिखित तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है –

(i) आरम्भिक काल-2500-2250 ई.पू.

(ii) प्रसारण काल 2250-1950 ई.पू.

(iii) हासोन्मुख काल 1950-1750 ई. पू.

Indus Valley Civilization pdf in Hindi

No.-1. सिन्धुघाटी सभ्यता का स्वरूप पुरातत्त्ववेत्ताओं के अनुसंधान एवं उत्खनन के दौरान पाए गए अवशेषों के आधार पर सिन्धुघाटी सभ्यता के स्वरूप को तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है –

(i) शान्तिजन्य सभ्यता

(ii) नगरीय सभ्यता

(iii) व्यापारिक सभ्यता

No.-2. सिन्धुघाटी सभ्यता में खुदाई के दौरान युद्ध के लिए प्रयुक्त होने वाले हथियारों की संख्या कम और घरेलू कार्यों में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों की संख्या अधिकतम थी।

No.-3. युद्ध के साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने के कारण सिन्धु सभ्यता को शान्तिमूलक या शान्तिजन्य सभ्यता के रूप में स्वीकृत किया है।

No.-4. उत्खनन से विशाल स्नानागार, अन्नागार-मोहनजोदड़ो में, एवं हड़या, मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, सुरकोटड़ा आदि स्थलों पर गढ़ी तथा निचले शहरों का अवशेष के रूप में प्राप्त होना, विशिष्ट तरीके से सड़कों एवं नालियों का बनी हुई अवस्था में प्राप्त होना-सिन्धुघाटी सभ्यता के स्वरूप को नगरीय सभ्यता के रूप में प्रदर्शित करती है।

No.-5. कालीबंगा में खेत जोतने के प्रमाण, राणापुंडई, सुरकोटड़ा में पशुपालन के प्रमाण, चन्हूदाड़ो में मनके बनाने का कारखाना, मीत्ताथल में कुम्भकारी के, तुर्कमेनिस्तान सीरिया (रास, समरा), ईरान (सूसा) में मुहर, बरतन मनके हाथीदाँत की छड़ों का उत्खनन के दौरान प्राप्त होना सिन्धुघाटी सभ्यता को व्यापारिक सभ्यता के रूप में प्रदर्शित करते हैं।

No.-6. सिन्धु सभ्यता का उद्गम कर्नल स्यूअल एवं डॉ. गुह ने सिन्धुघाटी सभ्यता में प्राप्त हुए अस्थिपिंजरों का विशिष्ट अध्ययन कर इस सभ्यता की प्रजातियों को चार भागों में वर्गीकृत किया है –

1.आदि आस्ट्रोलॉयड

  1. मंगोलियन
  2. भूमध्यसागरीय
  3. अल्पाईन
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