Hindi ke pramukh natakkar or unki kritiya

Hindi ke pramukh natakkar or unki kritiya

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भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अंधेर नगरी, भारत दुर्दशा, नीलदेवी, वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति जैसी रचनाएं कीं. सन् 1881 में मात्र एक रात में लिखा गया नाटक आज भी उतना ही सामयिक और समकालीन है. बाल रंगमंच हो अथवा वयस्क रंगमंच – यह नाटक सभी तरह के दर्शकों में लोकप्रिय है |

Hindi ke pramukh natakkar or unki kritiya

 

नाटककारनाटक
प्राणचंद चौहान रामायण महानाटक- 1610
कवि उदय हनुमान नाटक- 1840 (पद्यात्मक)
महाराज विश्वनाथ सिंह आनंद रघुनंदन
गोपालचंद्र (गिरिधर दास)[भरतेंदु के पिता] नहुष- 1857
गणेश कवि प्रद्युम्न विजय- 1863
शीतला प्रसाद त्रिपाठी जानकी मंगल- 1868
भारतेंदु हरिश्चंद्र
अनूदित नाटक 1. विद्या सुंदर, 2. रत्नावली, 3. पाखण्ड विडंबन, 4. धनंजय विजय, 5. कर्पूर मंजरी, 6. मुद्राराक्षस, 7. दुर्लभ बंधु
मौलिक नाटक 1. भारत जननी, 2. वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति, 3. सत्य हरिश्चंद्र, 4. श्रीचन्द्रावली नाटिका, 5. विषस्य विषमौषधम्, 6. भारत-दुर्दशा, 7. नीलदेवी, 8. अँधेरे नगरी, 9. सती प्रताप, 10. प्रेम जोगिनी
लाला श्रीनिवासदास संयोगिता स्वयंवर, श्री प्रहाद-चरित्र, रणधीर प्रेममोहिनी, तप्तासंवरण
राधाकृष्ण दास महाराणा प्रताप, महारानी पद्यावती, धर्मालाप, दुःखिनी बाला
बालकृष्ण भट्ट कलिराज की सभा, रेल का विकट खेल, नल-दमयंती स्वयंवर, बाल विवाह, शिक्षा दान, जैसा काम वैसा परिणाम (प्रहसन), नई रोशनी का विष, वेणी संहार
राधाचरण गोस्वामी तन मन धन गोसईं जी के अर्पण, अमरसिंह राठौर, बूढ़े मुँह मुँहासे लोग देखें तमासे (प्रहसन), सती चन्द्रावली, श्रीदामा
गोपालराम गहमरी देश दशा, जैसे को तैसा
किशोरीलाल गोस्वामी मयंक मंजरी
प्रताप नारायण मिश्र भारत-दुर्दशा रूपक, कलिकौतुक रूपक, हठी हम्मीर
जी. पी. श्रीवास्तव उलट फेर, गड़बड़झाला, दुमदार आदमी, कुर्सी मैंन, न घर का न घाट का
देवकीनंदन त्रिपाठी सीताहरण, रुक्मिणीहरण, भारत-हरण, कंसवध, गोवधनिषेध
अम्बिका दत्त व्यास मन की उमंग, भारत सौभाग्य
बदरी नारायण चौधरी भारत सौभाग्य
बलदेव प्रसाद मिश्र मीराबाई
दुर्गा प्रसाद मिश्र प्रभास मिलन
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ प्रद्युम्न विजय, रुक्मिणी परिणय

 

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