Geography Notes of India in Hindi

Geography Notes of India in Hindi

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Geography Notes of India in Hindi

भारत का समान्य परिचय मुख्य पृष्ठ

No.-1. भारत उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित एशिया महादेश का एक विशाल देश है।

No.-2. इसका अक्षांशीय विस्तार 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तर अक्षांश तक तथा शांतीय विस्तार 68°7′ पूर्वी देशांतर से 97025 पूर्वी देशांतर तक है।

No.-3. इस प्रकार इसका अक्षाशीय तथा देशांतरीय विस्तार लगभग 30° है।

No.-4. भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम अक्षांश 84 है जबकि भारत का सबसे दक्षिणतम बिन्दु इंदिरा प्वाइंट का अक्षांश 6°4′ है।

No.-5. भारत की उत्तर से दक्षिण लम्बाई 3214 किमी और पूर्व से पश्चिम चौड़ाई 2933 किमी है।

No.-6. इसकी स्थलीय सीमा की लम्बाई 15200 किमी तथा समुद्र तट की लम्बाई 7517 किमी है।

कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी है।

No.-7. भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम अक्षांश 84 है जबकि भारत का सबसे दक्षिणतम बिन्दु इंदिरा प्वाइंट का अक्षांश 6°4′ है।

No.-8. भारत की उत्तर से दक्षिण लम्बाई 3214 किमी और पूर्व से पश्चिम चौड़ाई 2933 किमी है।

No.-9. इसकी स्थलीय सीमा की लम्बाई 15200 किमी तथा समुद्र तट की लम्बाई 7517 किमी है।

No.-10. कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी है।

No.-11. भारत की स्थलीय सीमा उत्तर-पश्चिमी में पाकिस्तान और अफगानिस्तान से लगती है, उत्तर में तिब्बत (अब चीन का हिस्सा) और चीन तथा नेपाल और भूटान से लगी हुई है और पूर्व मे बांग्लादेश तथा म्यांमार से।

No.-12. बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह और अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप, भारत के द्वीपीय हिस्से हैं।

No.-13. इस प्रकार भारत की समुद्री सीमा दक्षिण-पश्चिम में मालदीव दक्षिण में श्री लंका और सुदूर दक्षिण-पूर्व में थाइलैंड और इंडोनेशिया से लगती है।

No.-14. पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ भारत की स्थलीय सीमा और समुद्री सीमा दोनों जुड़ी हैं।

No.-15. कर्क रेखा भारत के बीचो-बीच 8 राज्यों से होकर गुजरती है।

No.-16. ये राज्य निम्न है- गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा (त्र.) एवं मिजोरम।

No.-17. 82°30′ पूर्वी देशांतर को भारत का मानक याम्योत्तर या मीन टाइम लाइन माना गया है।

No.-18. यह उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के निकट मिर्जापुर के नैनी से गुजरती है।

No.-19. इसी के कारण इलाहाबाद को ‘शून्य मील केन्द्र’ कहा जाता है।

No.-20. किसी भी देश के मानक याम्योत्तर का चुनाव 7°30′ देशांतर के गुणक के साथ साथ देश के मध्य से गुजरने की शर्तों पर किया जाता है।

No.-21. इसी आधार पर 82°30′ याम्योत्तर को भारत का मानक याम्योत्तर चुना गया है।

No.-22. यह ग्रीनविच (लंदन) मीन

भारत के भौतिक प्रदेश मुख्य पृष्ठ

No.-1. भारत की भौगोलिक आकृतियों को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता है –

(1) हिमालय पर्वत श्रृंखला

(2) उत्तरी मैदान

(3) प्रायद्वीपीय पठार

(4) भारतीय मरुस्थल

(5) तटीय मैदान

(6) द्वीप समूह

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 हिमालय पर्वत

No.-1. भारत की उत्तरी सीमा पर विस्तृत हिमालय भूगर्भीय रूप से युवा एवं बनावट के दृष्टिकोण से वलित पर्वत श्रृंखला है।

No.-2. ये पर्वत श्रृंखलाएँ पश्चिम-पूर्व दिशा में सिंधु से लेकर ब्रह्मपुत्र तक फैली हैं।

No.-3. हिमालय विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है और एक अत्यधिक असम अवरोधों में से एक है।

ये 2,400 कि०मी० की लंबाई में फैले एक अर्द्धवृत्त का निर्माण करते हैं।

No.-4. इसकी चौड़ाई कश्मीर में 400 कि॰मी॰ एवं अरुणाचल में 150 कि॰मी॰ है।

No.-5. पश्चिमी भाग की अपेक्षा पूर्वी भाग की ऊँचाई में अधिक विविधता पाई जाती है।

No.-6. अपने पूरे देशांतरीय विस्तार के साथ हिमालय को तीन भागों में बाँट सकते हैं।

उत्तर का विशाल मैदान

No.-1. उत्तरी मैदान तीन प्रमुख नदी प्रणालियों- सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र तथा इनकी सहायक नदियों से बना है।

यह मैदान जलोढ़ मृदा से बना है।

No.-3. लाखों वर्षों में हिमालय के गिरिपाद में स्थित बहुत बड़े बेसिन (द्रोणी) में जलोढों का निक्षेप हुआ, जिससे इस उपजाऊ मैदान का निर्माण हुआ है।

No.-3. इसका विस्तार 7 लाख वर्ग कि०मी० के क्षेत्र पर है।

No.-4. यह मैदान लगभग 2,400 कि०मी० लंबा एवं 240 से 320 कि०मी० चौड़ा है।

प्रायद्वीपीय पठार

No.-1. प्रायद्वीपीय पठार एक मेज की आकृति वाला स्थल है जो पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से बना है।

No.-2. यह गोंडवाना भूमि के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था तथा यही कारण है कि यह प्राचीनतम भूभाग का एक हिस्सा है।

No.-3. इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं।

No.-4. इस पठार के दो मुख्य भाग हैं- ‘मध्य उच्चभूमि’ तथा ‘दक्कन का पठार’।

No.-5. नर्मदा नदी के उत्तर में प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो कि मालवा के पठार के अधिकतर भागों पर फैला है उसे मध्य उच्चभूमि के नाम से जाना जाता है।

No.-6. विंध्य शृंखला दक्षिण में मध्य उच्चभूमि तथा उत्तर-पश्चिम में अरावली से घिरी है।

No.-7. पश्चिम में यह धीरे-धीरे राजस्थान के बलुई तथा पथरीले मरुस्थल read more….

भारत की जलवायु मुख्य पृष्ठ

मानसून का प्रथम अध्ययन अरबी भूगोलवेत्ता अलमसूदी के द्वारा किया गया, इसी कारण मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के मौसिम शब्द से हुई है। मौसिम शब्द का अर्थ पवनों की दिशा का मौसम के अनुसार पलट जाना है।      भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक इस प्रकार है-

अक्षांश

No.-1. भूमध्य रेखा से दूरी बढ़ने अर्थात् बढ़ते हुए अक्षांश के साथ तापमान में कमी आती है क्योंकि सूर्य की किरणों के तिरछी होने से सौर्यातप की मात्रा प्रभावित होती है।

No.-2. कर्क रेखा भारत के मध्य भाग से गुजरती है। इस प्रकार भारत का उत्तरी भाग शीतोष्ण कटिबंध में तथा कर्क रेखा के दक्षिण में स्थित भाग उष्ण कटिबंध में पड़ता है, तो वहीं उष्ण कटिबंध में भूमध्य रेखा के अधिक निकट होने के कारण वर्ष भर ऊँचे तापमान और कम दैनिक व वार्षिक तापांतर पाए जाते हैं|

No.-3.  तथा शीतोष्ण कटिबंध में भूमध्य रेखा से दूर होने के कारण उच्च दैनिक व वार्षिक तापांतर के साथ विषम जलवायु पाई जाती है। अंत: हम कह सकते हैं कि भारत की जलवायु में उष्ण कटिबंधीय व उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु दोनों की विशेषताएँ उपस्थित हैं ।

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मानसूनी पवनें

मानसूनी पवनें भी भारतीय भू-भाग की जलवायु के निर्धारक तत्व हैं, तो वहीं ये मानसूनी पवनें ग्रीष्मकाल में दक्षिण-पश्चिम तथा शीतकाल में उत्तर-पूर्व दिशा में बहती हैं तथा ये मानसूनी पवनें देश में वर्षा की मात्रा, आर्दता एवं तापमान को प्रभावित करती हैं।

 

समुद्र तल से ऊँचाई

ऊँचाई के साथ तापमान घटता है, वहीं सामान्यतः प्रति 165 मीटर की ऊँचाई पर 1 डिग्री सेल्सियस तापमान कम हो जाता है। विरल वायु के कारण पर्वतीय प्रदेश मैदानों की तुलना में अधिक ठंडे होती हैं तथा एक ही अक्षांश पर स्थित होते हुए भी ऊँचाई की भिन्नता के कारण ग्रीष्मकालीन औसत तापमान में विभिन्न स्थानों में भिन्नता पाई जाती है।

 उच्चावच

भारत का भौतिक स्वरूप अथवा उच्चावच तापमान, वायुदाब, पवनों की गति एवं दिशा तथा ढाल की मात्रा तथा वितरण को प्रभावित करता है। उदाहरणार्थ जून और जुलाई के बीच पश्चिमी घाट तथा असोम के पवनाभिमुखी ढाल अधिक वर्षा प्राप्त करते हैं,

भारत की नदियां मुख्य पृष्ठ

प्राचीन काल में व्यापारिक एवं यातायात की सुविधा के कारण देश के अधिकांश नगर नदियों के किनारे ही विकसित हुए थे तथा आज भी देश के लगभग सभी धार्मिक स्थल किसी न किसी नदी से सम्बद्ध है।

नदियों के देश कहे जाने वाले भारत में मुख्यतः हिमालय से निकलने वाली नदियाँ(सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र), प्रायद्वीपीय नदी(नर्मदा, कावेरी, महानदी) प्रणाली है।

हिमालय से निकलने वाली नदियाँ मुख्य पृष्ठ

No.-1. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ बर्फ़ और ग्‍लेशियरों( हिमानी या हिमनद) के पिघलने से बनी हैं अत: इनमें पूरे वर्ष के दौरान निरन्‍तर प्रवाह बना रहता है।

No.-2. हिमालय की नदियों के बेसिन बहुत बड़े हैं एवं उनके जलग्रहण क्षेत्र सैकड़ों-हजारों वर्ग किमी. में फैले हैं।

No.-3. हिमालय की नदियों को तीन प्रमुख नदी-तंत्रों में विभाजित किया गया है।

No.-4. सिन्धु नदी-तंत्र, गंगा नदी-तंत्र तथा ब्रह्मपुत्र नदी-तंत्र।

No.-5. इन तीनों नदी-तंत्रों का विकास एक अत्यन्त विशाल नदी से हुआ, जिसे ‘शिवालिक’ या हिन्द-ब्रह्म नदी भी कहा जाता था।

No.-6. यह नदी ओसम से पंजाब तक बहती थी।

No.-7. प्लीस्टोसीन काल में जब ‘पोटवार पठार का उत्थान’ हुआ तो यह नदी छिन्न-भिन्न हो गई एवं वर्तमान तीन नदी तंत्रों में बंट गई।

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दक्षिण भारत की नदियां मुख्य पृष्ठ

No.-1. दक्षिण भारत की नदियों को दो भागों में बाँटा गया है –

No.-2. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां

No.-3. अरब सागर में गिरने वाली नदियां

No.-4. प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र मुख्य पृष्ठ

No.-5. भारतीय प्रायद्वीप में अनेक नदियां प्रवाहित हैं।

No.-6. मैदानी भाग की नदियों की अपेक्षा प्रायद्वीपीय भारत की नदियां आकार में छोटी हैं।

No.-7. यहां की नदियां अधिकांशतः मौसमी हैं और वर्षा पर आश्रित हैं।

No.-8. वर्षा ऋतु में इन नदियों के जल-स्तर में वृद्धि हो जाती है, पर शुष्क ऋतु में इनका जल-स्तर काफी कम हो जाता है। इस क्षेत्र की नदियां कम गहरी हैं, परंतु इन नदियों की घाटियां चौड़ी हैं और इनकी अपरदन क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है।

No.-9. यहां की अधिकांश नदियां बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, कुछ नदियां अरब सागर में गिरती हैं और कुछ नदियां गंगा तथा यमुना नदी में जाकर मिल जाती हैं।

No.-10. प्रायद्वीपीय क्षेत्र की कुछ नदियां अरावली तथा मध्यवर्ती पहाड़ी प्रदेश से निकलकर कच्छ के रन या खंभात की खाड़ी में गिरती हैं।

 

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