Bharat Me Janjatiya  भारत में जनजातियाँ

 Bharat Me Janjatiya  भारत में जनजातियाँ

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जनजाति (tribe) वह सामाजिक समुदाय है जो राज्य के विकास के पूर्व अस्तित्व में था या जो अब भी राज्य के बाहर हैं। जनजाति वास्‍तव में भारत के आदिवासियों के लिए इस्‍तेमाल होने वाला एक वैधानिक पद है। भारत के संविधान में अनुसूचित जनजाति पद का प्रयोग हुआ है और इनके लिए विशेष प्रावधान लागू किये गए हैंभारत में जनजातियों की जनसंख्या -: 1991 की जनगणना के अनुसार 6,77,58,380 भारत में जनजातियों की जनसंख्या है।

 Bharat Me Janjatiya  भारत में जनजातियाँ

भारत में पाई जाने वाली जनजातियों का विस्तारपूर्वक अध्ययन

भील जनजाति

No.-1. भारत की एक प्रमुख जनजाति हैं। यह जाति राजस्थान राज्य की मुख्य जातियों में से एक है। इस जाति के लगभग 39 प्रतिशत लोग, जो राजस्थान में बनस्वारा गाँव में बसते हैं, वे सभी भील जाति के हैं।

No.-2. यह भारत की तीसरी बड़ी आदिवासी जाति है। आर्थिक रूप से इस जाति के लोग स्थायी रूप से कृषक, सामाजिक दृष्टि से पितृ-सत्तात्मक जनजाति एवं परम्परागत रूप से एक अच्छे तीरंदाज होते हैं।

No.-3. वर्तमान समय में यह जनजाति विकास के विभन्न चरणों में मानी जाती है।

सेंटिनलीज जनजाति

No.-1. यह जनजाति एक प्रतिबंधित उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहने वाली एक नेग्रिटो जनजाति है।

No.-2. 2011 के जनगणना आँकड़ों के अनुसार द्वीप पर इनकी संख्या 15 के आस-पास थी।

No.-3. जहाँ एक तरफ अंडमान द्वीप में चार नेग्रिटो जनजातियों- ग्रेट अंडमानी, ओंगे/ओंज, जारवा तथा सेंटिनलीज का निवास है तो वहीं दूसरी तरफ निकोबार में दो मंगोलॉइड जनजातियाँ मसलन- निकोबारी और शोम्पेन का निवास है।

No.-4 सेंटिनलीज के साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की अन्य जनजातियाँ- ग्रेट अंडमानी, ओंगे, जारवा तथा शोम्पेन भारत की विशेष रूप से अति संवेदनशील जनजातीय समूहों यानी Particularly Vulnerable Tribal Groups (PVTGs) में शामिल हैं।

No.-5. “आज दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा भारत ने हासिल तो कर लिया है लेकिन अब भी एक तबका ऐसा है जो हाशिये पर है।

No.-6. इस तबके के अंतर्गत वे जनजातियाँ आती हैं जो सुदूरवर्ती इलाकों में जीवन यापन कर रही हैं और कई समस्याओं को झेल रही हैं।”

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गोंड जनजाति

No.-1. गोंड मध्य प्रदेश की सबसे महत्त्वपूर्ण जनजाति है, जो प्राचीन काल के गोंड राजाओं को अपना वंशज मानती है। यह एक स्वतंत्र जनजाति थी, जिसका अपना राज्य था और जिसके 52 गढ़ थे।

No.-2. मध्य भारत में 14वीं से 18वीं शताब्दी तक इसका राज्य रहा था। मुग़ल शासकों और मराठा शासकों ने इन पर आक्रमण कर इनके क्षेत्र पर अधिकार कर लिया और इन्हें घने जंगलों तथा पहाड़ी क्षेत्रों में शरण लेने को बाध्य किया।

No.-3. गोंडों की लगभग 60 प्रतिशत आबादी मध्य प्रदेश में निवास करती है।

No.-4. शेष आबादी का अधिकांश भाग ‘संकलन’, आन्ध्र प्रदेश एवं उड़ीसा में बसा हुआ है।

No.-5. गोंड जनजाति के वर्तमान निवास स्थान मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्यों के पठारी भाग, जिसमें छिंदवाड़ा, बेतूल, सिवानी और माडंला के ज़िले सम्मिलित हैं।

No.-6.  छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिणी दुर्गम क्षेत्र, जिसमें बस्तर ज़िला सम्मिलित है, आते हैं।

No.-7. इसके अतिरिक्त इनकी बिखरी हुई बस्तियाँ छत्तीसगढ़ राज्य, गोदावरी एवं बैनगंगा नदियों तथा पूर्वी घाट के बीच के पर्वतीय क्षेत्रों में एवं बालाघाट, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़, रायसेन और खरगोन ज़िलों में भी हैं।

No.-8. उड़ीसा के दक्षिण-पश्चिमी भाग तथा आन्ध्र प्रदेश के पठारी भागों में भी यह जनजाति रहती है।

खासी जनजाति

No.-1. पूर्वोत्तर भारत में मेघालय राज्य की ‘खासी’ और ‘जैंतिया’ पहाड़ियों के निवासी है।

No.-2. खासियों की एक विशिष्ट संस्कृति है।

No.-3. संपत्ति का उत्तराधिकार और जनजातिय शासन का उत्तराधिकार, दोनों मातृवंश के आधार पर होते हैं और माँ से सबसे छोटी बेटी को मिलते हैं, हालांकि शासन और संपत्ति का प्रबंधन इन महिलाओं द्वारा चुने गए पुरुषों के हाथ में होता है।

No.-4. यह व्यवस्था कई खासियों के द्वारा ईसाई धर्म अपनाने के बाद, जनजातिय धर्म की पारंपरिक और नए धर्म की माँगों के बीच हुए संघर्ष और स्वयं अर्जित संपत्ति के संबंध में लोगों के द्वारा वसीयत के अधिकार के कारण परिवर्तित हो गई है।

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नागा जनजाति

No.-1. नागा भारत की प्रमुख जनजातियों में से एक है। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैण्ड, जिसमें नंगा पर्वत श्रेणियाँ फैली हुई हैं, नागा जनजाति का मूल निवास स्थान है।

No.-2. ‘नागा’ शब्द की उत्पत्ति के बारे में विद्वानों के विचार भिन्न-भिन्न हैं। कुछ की मान्यता है कि यह शब्द संस्कृत के ‘नागा’ शब्द से निकला है, जिसका अर्थ ‘पहाड़’ से होता है और इस पर रहने वाले लोग ‘पहाड़ी’ या ‘नागा’ कहलाते हैं। कच्छारी भाषा में ‘नागा’ से तात्पर्य ‘एक युवा बहादुर लड़ाकू व्यक्ति’ से लिया जाता है।

No.-3.  टोल्मी के अनुसार ‘नागा’ का अर्थ ‘नंगे’ रहने वाले व्यक्तियों से है। डॉक्टर वैरियर इल्विन का कथन है कि ‘नगा’ शब्द की उत्पत्ति ‘नॉक’ या ‘लोग’ से हुई है। अत: उत्तरी-पूर्वी भारत में रहने वाले इन लोगों को ‘नगा’ कहते हैं।

No.-4. नंगे रहने से ‘नगा’ शब्द का सम्बन्ध नहीं माना जाता, क्योंकि यह जनजाति पूर्णत: नंगी नहीं रहती।

बंजारा

No.-1. बंजारा मानवों का ऐसा समुदाय है जो एक ही स्थान पर बसकर जीवन-यापन करने के बजाय एक स्थान से दूसरे स्थान पर निरन्तर भ्रमनशील रहता है।

No.-2. इनकी संख्या 1901 ई. की भारतीय जनगणना में 7,65,861 थी।

No.-3.  इनका व्यवसाय रेलवे के चलने से कम हो गया है और अब ये मिश्रित जाति हो गये हैं।

No.-4. ये लोग अपना जन्म सम्बन्ध उत्तर भारत के ब्राह्मण अथवा क्षत्रिय वर्ण से जोड़ते हैं।

No.-5. दक्षिण में आज भी ये अपने प्राचीन विश्वासों एवं रिवाजों पर चलते देखे जाते हैं, जो द्रविड़वर्ग से मिलते-जुलते हैं।

No.-6. बंजारों का धर्म जादूगरी है और ये गुरु को मानते हैं। इनका पुरोहित भगत कहलाता है।

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गुर्जर समाज

No.-1. गुर्जर समाज, प्राचीन एवं राज्य करने वाले समाज में से एक है। गुर्जर अभिलेखो के अनुसार ये सूर्यवंश या रघुवंश से सम्बन्ध रखते हैं।

No.-2. प्राचीन महाकवि राजसेखर ने गुर्जरो को रघुकुल-तिलक तथा रघुग्रामिणी कहा है।

No.-3. 7वीं से 10वीं शताब्दी के गुर्जर शिलालेखो पर सूर्यदेव की कलाकृतिया भी इनके सूर्यवंशी होने की पुष्टि करती ।है

No.-4. राजस्थान में आज भी गुर्जरो को सम्मान से मिहिर बोलते हैं, जिसका अर्थ सूर्य होता है

No.-5. कुछ इतिहासकरो के अनुसार गुर्जर मध्य एशिया के कॉकेशस क्षेत्र (अभी के आर्मेनिया और जॉर्जिया) से आए आर्य योद्धा थे।

थारू जाति

No.-1. थारू जाति भारत और नेपाल की जनजातियों में से एक है।

No.-2. यह जाति भारत के उत्तरांचल और नेपाल के दक्षिण भाग में हिमालय के तराई क्षेत्र में प्रमुखत: पाई जाती है। 20वीं सदी के अंत तक नेपाल में थारू जाति के लोगों की संख्या लगभग 7 लाख, 20 हज़ार और भारत में लगभग 10 हज़ार थी।

No.-3. थारू जाति के लोग सांस्कृतिक रूप से भारत से जुड़े हैं और ये भारोपीय भाषा परिवार के ‘भारतीय-ईरानी समूह’ के अंतर्गत आने वाली भारतीय-आर्य उपसमूहों की भाषा बोलते हैं।

मीणा

No.-1. मीणा मुख्यत: भारत के राजस्थान राज्य में निवास करने वाली एक जाति है।

No.-2. मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है। मीणा ‘मीन’ धातु से बना है। सबसे अधिक मीणा जाति के लोग जयपुर (सर्वाधिक), सवाई माधोपुर, उदयपुर, आदि ज़िलों में निवास करते हैं।

No.-3. मीणा पुराण – रचियता –आचार्य मुनि मगन सागर

No.-4. लोक देवी – जीणमाता (रैवासा, सीकर)

No.-5. नाता प्रथा – इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चों को छोड़कर दूसरे पुरष से विवाह कर लेती है।

गरासिया जनजाति

No.-1. गरासिया भारत के राज्य राजस्थान की प्रमुख जनजाति है।

No.-2. गरासिया की कुल आदिवासी जनसंख्या में लगभग 2.5 प्रतिशत है।

No.-3. यह जनजाति मुख्य रूप से उदयपुर ज़िले के खेरवाड़ा, कोटड़ा, झाड़ोल, फलासिया, गोगुन्दा क्षेत्र एवं सिरोही ज़िले के पिण्डवाड़ा तथा आबू रोड़ तथा पाली ज़िले के बाली क्षेत्र में बसी हुई है।

No.-4. ये गोगुन्दा (देवला) को अपनी उत्पत्ति मानते हैं। गरासिया जनजाति के लोग स्वयं को चौहान राजपूतों का वंशज मानते हैं।

No.-5. लोक कथाओं के अनुसार गरासिया जनजाति के लोग यह मानते हैं कि ये पूर्व में अयोध्या के निवासी थे और भगवान रामचन्द्र के वंशज थे।

No.-6. ये लोग यह भी मानते हैं कि उनकी गौत्रें बप्पा रावल की सन्तानों से उत्पन्न हुई थीं।

No.-7. इनमें डामोर, चौहान, वादिया, राईदरा एवं हीरावत आदि गोत्र होते हैं। ये गोत्र भील तथा मीणा जाति में भी पाई जाती है।

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सहरिया जनजाति

No.-1. सहरिया जनजाति राजस्थान, मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना, ग्वालियर और शिवपुरी में पायी जाती है।

No.-2.  ‘सहरिया’ शब्द पारसी के ‘सहर’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है- ‘जंगल’। इस जाति के लोग जंगल में निवास करते हैं।

No.-3. इन लोगों का परिवार पितृसत्तात्मक होता है। भारत सरकार ने सहरिया जनजाति को आदिम जनजाति माना है।

No.-4. सहरिया जनजाति के लोग हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा करते हैं।

डफला जनजाति

No.-1. डफला जाति के लोग बंगनी भी कहलाते हैं, पूर्वी भूटान और अरुणाचल प्रदेश (भूतपूर्व नॉर्थ-ईस्ट फ़्रंटियर एजेंसी, नेफ़ा) के जनजातीय लोग है।

No.-2. ये लोग चीनी-तिब्बती परिवार की तिब्बती-बर्मी भाषा बोलते हैं।

No.-3. डफला अपना भरण-पोषण झूम खेती, शिकार और मछली मारकर करते हैं।

No.-4. ये 900 से 1,800 मीटर की ऊँचाई पर बल्लियों पर बने मकानों में रहते हैं।

No.-5. वंश का निर्धारण पैतृक आधार पर किया जाता है, जो 60 या 70 लोगों का एक कुटुंब होता है।

No.-6. यह कुटुंब एक लंबे घर में एक साथ रहता है, जिसमें विभाजित खंड नहीं होते, लेकिन प्रत्येक दंपति के परिवार के लिए एक अलग चूल्हा होता है।

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NO.-1. अंगामी, आओ जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

नागालैण्ड

NO.-2. मिकिर जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

असम

NO.-3. अपतनी जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

अरुणाचल प्रदेश

NO.-4. मोपला जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

केरल

NO.-5. बैगा, भुइयाँ, मुरिया जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

मध्य प्रदेश

NO.-6. खस जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

उत्तराखण्ड

NO.-7. बक्करवाल जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

जम्मू-कश्मीर

NO.-8. कोटा जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

तमिलनाडु

NO.-9. बड़गा गद्दी जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

हिमाचल प्रदेश

NO.-10. टोडा जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

नीलगिरी पहाड़ियाँ

NO.-11. इरुला जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

तमिलनाडु

NO.-12. मुण्डा जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

झारखण्ड, पश्चिम बंग

NO.-13. चेंचू जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

आन्ध्र प्रदेश

NO.-14. लेप्चा जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

सिक्किम

NO.-15. जारवा जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

अण्डमान निकोबार द्वीप

NO.-16. गोण्ड जनजाति भारत के किस राज्य में पाई जाती है

मध्य प्रदेश, झारखण्ड

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