Bharat Ki Jhile - भारत की प्रमुख झीलें

Bharat Ki Jhile – भारत की प्रमुख झीलें

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आज हम भारत के प्रमुख झील (List of important Lakes in India) के विषय में चर्चा करेंगे. ऐसे सवाल प्रायः UPSC, SSC या रेलवे परीक्षा में आते रहते हैं…रो के रूप में या तो ऑप्शन में राज्य के नाम दिए रहते हैं और

वैसे सच कहूँ तो झीलों के नाम सुनने में काफी अटपटे हैं इसलिए इन्हें याद कर पाना टेढ़ी खीर है. आप चाहे तो कोई शोर्ट ट्रिक अपना सकते हो. यदि आपके पास कोई शोर्ट ट्रिक है

Bharat Ki Jhile – भारत की प्रमुख झीलें

झीलों के प्रकार

No.-1. भारत में कई प्राकृतिक व मानवनिर्मित झीलें पायी जाती है।

No.-2. प्राकृतिक झीलों को कई वर्गो में बांटा गया है।

विवर्तनिक झील

No.-1. धरातल के बड़े भाग के धसने या उठने से इनका निर्माण होता है।

No.-2. कश्मीर का वूलर झील(झेलम नदी पर) इसका उदाहरण है।

No.-3. यह भारत की मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है।

लैगून / अनूप झील

No.-1. तटीय समुद्री जल का कुछ भाग बालू या प्रवाल भित्ति द्वारा मुख्य भूमि से अलग झीलनुमा आकृति बना लेता है।

No.-2. इसे ही लैगून झील कहते हैं।

No.-3. चिल्का सबसे बड़ी लैगून झील है।

No.-4. यह सबसे बड़ी तटीय झील भी है।

No.-5. यहां नौ-सेना का प्रशिक्षण केन्द्र भी है।

No.-6. पुलीकट झील(आंध्रप्रदेश व तमिलनाडु) बेम्बनाद(केरल), अष्ठामुडी(केरल), कोलेरू झील(आन्ध्र प्रदेश) अन्य प्रमुख लैगून झीले हैं।

हिमानी निर्मित झील

No.-1. हिमनदों द्वारा निर्मित गर्तों में हिम के पिघले हुए जल से इस प्रकार की झीलों का निर्माण होता है।

No.-2.  कभी-कभी हिमनदी के पिघले जल से “हिमोढ़ झीलों” (morane lakes) का निर्माण होता है।

No.-3. पीरपंजाल श्रेणी के उत्तरी-पूर्वी ढालों पर ऐसी ही झीलें पाई जाती हैं।

No.-4. हिमानी या हिमनद के अपरदन से बनी झीले – राकसताल, नैनीताल, भीमताल, समताल इनके उदाहरण हैं।

वायु निर्मित झील

No.-1. हवा द्वारा सतह की मिट्टी को उड़ाकर ले जाने से ऐसी झीलों का निर्माण होता है।

No.-2. इन्हें ‘प्लाया’ झील भी कहते हैं।

No.-3. राजस्थान की सांभर, डीडवाना, पंचभद्रा प्रमुख उदाहरण हैं।

डेल्टाई झील

No.-1. डेल्टाई झीलों का निर्माण डेल्टाई प्रदेशों में कई वितरिकाओं के मध्य छोटी बड़ी झीलों के रूप में होता है।

No.-2. जो प्रायः मीठे जल की होती हैं।

No.-3. उदाहरण – कोलेरू झील।

Bharat Ki Jhil – भारत की प्रमुख झीलें

भू-गर्भिक क्रिया से बनीं झीलें

No.-1. पहाड़ों से बर्फ, पत्थर आदि भूमि पर गिरने से धरातल पर विशाल गड्ढे बन जाते हैं।

No.-2. इनमें जल भरने से जो झीलें बनती हैं, उन्हें भू-गर्भिक क्रिया से बनीं झीलें कहते हैं।

No.-3. कश्मीर की वूलर और कुमायूँ की अनेक झीलें इसी प्रकार की हैं।

ज्वालामुखी – क्रिया से निर्मित झीलें

No.-1. ज्वालामुखी विस्फोट से उत्पन्न क्रेटर या काल्डेरा में जल भरने से झील बनती हैं।

No.-2. महाराष्ट्र में Buldhana District की लोनार झील इसी प्रकार से बनी है।

पवन-क्रिया से बनीं झीलें

No.-1. मरुस्थल में पवन क्रिया से अपवाहन गर्त (Blowouts) बन जाते हैं।

No.-2. वर्षाकाल में इनमें जल भर जाता है।

No.-3. वाष्पीकरण अधिक होने से सतह पर लवण की परतें एक जगह इकठ्ठा हो जाती हैं और फलस्वरूप खारी झीलें बन जाती हैं।

No.-4. राजस्थान की साम्भर, डीडवाना, पंचभद्रा ऐसी ही झीलें हैं।

घुलन क्रिया से निर्मित झीलें

No.-1. चूना पत्थर, जिप्सम, लवण आदि घुलनशील शैलों के प्रदेश में जल की घुलन क्रिया से ये झीलें उत्पन्न होती हैं।

No.-2. असम में ऐसी झीलें पायी जाती हैं।

भू-स्खलन से निर्मित झीलें

No.-1. पर्वतीय ढालों पर बड़े-बड़े शिलाखण्डों के गिरने से कभी-कभी नदियों के मार्ग रुक जाते हैं और इनमें जल एकत्रित होने लगता है और अंततः झील बन जाती है।

No.-2. अलकनंदा के मार्ग में शैल-स्खलन से गोहाना नामक झील का निर्माण हुआ था।

विसर्प झीलें

No.-1. मैदानी क्षेत्र में नदियाँ घुमावदार मार्ग से प्रवाहित होती हैं।

No.-2. जब इन मोड़ों के सिरे कट जाते हैं और नदी सीधे मार्ग से बहने लगती है तब विसर्प झीलें बनती हैं।

No.-3. गंगा की मध्य व निचली घाटी में ऐसी अनेक झीलें पाई जाती हैं. पश्चिम बंगाल में उन्हें “बील” (beels) कहते हैं।

Bharat K Jhile – भारत की प्रमुख झीलें

अनूप या लैगून झीलें

No.-1. नदियों के मुहाने पर समुद्री लहरों तथा पवनों की क्रिया से बालू के टीले बन जाते हैं।

No.-2. इसके पीछे एकत्रित जल लैगून के रूप में अवशिष्ट रहता है।

No.-3. उड़ीसा का चिल्का झील ऐसा ही है।

No.-4. भारत की झीलों की राज्यवार सूची

वूलर झील

No.-1. वुलर झील जम्मू और कश्मीर के बांदीपुर ज़िले में स्थित है।

No.-2. यह भारत की सबसे बड़ी ताजे पानी की झीलों में से एक है।

No.-3. कुछ वर्ष पूर्व तक वुलर एशिया की मीठे पानी की सबसे बडी झील हुआ करती थी

No.-4. झील का प्राचीन नाम ‘महापद्मसर’ था।

No.-5. यह झील 30 से 260 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली हुई है।

No.-6. वुलर झील पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है।

No.-7. झेलम नदी इसमें अपना अस्थायी डेल्टा बनाती है।

No.-8. वर्तमान समय में इसका क्षेत्रफल तेज़ी से घट रहा है।

No.-9. झेलम के सरपीलाकार चलने के कारण बनी है।

No.-10. इसे गोखुर झील भी कहा जाता है।

डल झील

No.-1. डल झील, जम्मू और कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर में स्थित है।

No.-2. यह 17 किमी क्षेत्र में फैली हुई झील है।

No.-3. डल झील जम्मू-कश्मीर की दूसरी सबसे बड़ी झील है।

No.-4. मुख्य रूप से इस झील में मछली पकड़ने का काम होता है।

No.-5. झील के चार जलाशय हैं गग़रीबल, लोकुट डल, बोड डल तथा नागिन।

No.-6. यह  ताजे पानी की झील है।

No.-7. यहां पर दल-दल पाये जाते हैं।

शेषनाग झील

No.-1. शेषनाग झील अनंतनाग जिले में पहलगाम घाटी से 23 किमी दूर है।

No.-2. समुद्र तल से इसकी ऊँचाई 11,780 फीट है।

No.-3. झील 1.1 किमी लंबी और 700 मीटर चौड़ी है।

No.-4. सर्दियों के दौरान, झील जम जाती है।

No.-5. जब गर्मी के मौसम में बर्फ अधिक पिघलती है, तो पानी की निकासी के लिए अतिरिक्त पानी लिडार नदी में चला जाता है।

No.-6. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस झील का निर्माण खुद सांपों के राजा शेषनाग ने किया था।

No.-7. झील तीर्थयात्रियों के लिए एक प्राचीन तीर्थ स्थल है।

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सांभर झील

No.-1. सांभर झील फुलेरा जंक्शन, जयपुर में स्थित है।

No.-2. सांभर झील अजमेर, नागौर, जयपुर तीन जिलों में फैली हुई है।

No.-3. बिजौलिया शिलालेख के अनुसार इस झील का निर्माण वासुदेव चौहान के द्वारा करवाया गया।

No.-4. सांभर चौहानों की राजधानी तथा अकबर की विवाह स्थली के रूप में प्रसिद्ध है।

No.-5. वासुदेव चौहान को चौहानवंश का संस्थापक माना जाता है।

No.-6. इस झील में जल गिराने वाली प्रमुख नदियां मेंथा, रूपनगढ़, खारी व खण्डेल है।

No.-7. सांभर झील एशिया का सबसे बड़ा अंतःस्थलीय नमक उत्पादन केन्द्र है।

No.-8. केन्द्र सरकार के सहयोग से इस झील में हिंदुस्तान नमक कंपनी की स्थापना की गई।

No.-9. हिंदुस्तान नमक कंपनी के सहयोग से सांभर साल्ट योजना (1964) चलाई जा रही है।

No.-10. इस झील में साल्ट म्यूजियम ( 1870) स्थित है।

No.-11. सर्दियों में इस झील के किनारे राजहंस देखे जा सकते है।

 पुष्कर झील

No.-1. पुष्कर झील अजमेर में नेशनल हाइवे 89 पर स्थित है।

No.-2. यह झील ज्वालामुखी से निर्मित है।

No.-3. अतः यह कालाडेरा झील कहलाती है।

No.-4. पद्मपुराण के अनुसार इस झील का निर्माण ब्रह्मा जी ने करवाया था।

No.-5. पुष्कर झील का नाम पुष्करणा ब्राह्मणों के नाम पर रखा गया है।

No.-6. पुष्कर झील को प्राचीनकाल में परूषकारण्य के नाम से जाना जाता है।

No.7-. पुष्कर झील राजस्थान में अर्द्धचंद्राकार रूप में फैली हुई है। .

No.8. इस झील को जल की व्यवस्था सरस्वती नाले के द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है।

No.9. पुष्कर झील को हिंदुओं का पांचवां तीर्थ, कोंकण तीर्थ, प्रयागराज का गुरू, तीर्थराज के नाम से जाना जाता है।

No.-10. पुष्कर झील राजस्थान की सबसे पवित्र, प्राचीन, प्राकृतिक व प्रदूषित झील है।

No.-11. कार्तिक पूर्णिमा को इस झील के किनारे विशाल मेला भरता है, इस मेले को राजस्थान का रंगीला मेला कहा जाता है।

No.-12. पुष्कर को तीर्थों का मामा के उपनाम से जाना जाता है।

No.-13. मंचकुण्ड, धौलपुर को तीर्थों का भान्जा के नाम से जाना जाता है।

No.-14. पुष्कर झील के किनारे विश्वामित्र ने तपस्या की जिसे मेनका ने भंग कर दिया।

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त्सो कार झील

No.-1. दक्षिण-पश्चिम छोर पर एक छोटी सी झील, स्टार्ट्सपुक त्सो से एक आंतरिक नहर से जुड़ा हुआ है, और उसके साथ मिलकर 9 किमी2 का मैदानी पूल बनाते हैं, जो दो पहाड़ों, थुगे (6050 मीटर) और गुर्सन (6370 मीटर) से घिरे हुए हैं।

No.-2. अधिक मैदानों के भूविज्ञान से, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि ऐतिहासिक समय में त्सो कार इस उच्च घाटी तक फैला हुआ था।

No.-3. कुछ साल पहले तक झील नमक का एक महत्वपूर्ण स्रोत था, जिसे चांगपा स्थानीय लोग तिब्बत में निर्यात करने के लिए उपयोग करते थे।

No.-4. थगजा का नाममात्र गांव उत्तर में 3 किमी पर स्थित है। झील के पश्चिमी तट पर एक तम्बू शिविर है जो पर्यटकों के लिए आवास प्रदान करता है।

No.-5. उच्च ऊंचाई के कारण, सर्दियों में जलवायु चरम रहती है; -40 डिग्री सेल्सियस (-40 डिग्री फारेनहाइट) से नीचे तापमान असामान्य नहीं है।

No.-6. गर्मियों में तापमान दिन के दौरान अत्यधिक उतार चढ़ाव के साथ 30 डिग्री सेल्सियस (86 डिग्री फारेनहाइट) से ऊपर रहता है। बारिश या बर्फ के रूप में वर्षा बहुत दुर्लभ होती है

शेषनाग झील

No.-1. शेषनाग झील अनंतनाग जिले में पहलगाम घाटी से 23 किमी दूर है।

No.-2. समुद्र तल से इसकी ऊँचाई 11,780 फीट है।

No.-3. झील 1.1 किमी लंबी और 700 मीटर चौड़ी है।

No.-4. सर्दियों के दौरान, झील जम जाती है।

No.-5. जब गर्मी के मौसम में बर्फ अधिक पिघलती है, तो पानी की निकासी के लिए अतिरिक्त पानी लिडार नदी में चला जाता है।

No.-6. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस झील का निर्माण खुद सांपों के राजा शेषनाग ने किया था।

No.-7. झील तीर्थयात्रियों के लिए एक प्राचीन तीर्थ स्थल है।

नक्की झील

No.-1. नक्की झील माउण्ड आबू-सिरोही में स्थित हैं।

No.-2. माना जाता है कि इस झील का निर्माण देवताओं ने अपने नाखूनों से करवाया था।

No.-3. इस झील का निर्माण 14वीं शताब्दी में करवाया गया।

No.-4. यह झील विवर्तनिकी/क्रेटर झील का उदाहरण है।

No.-5. यह राजस्थान की सर्वाधिक ऊंचाई ( 1200 मी.) पर स्थित झील है।

No.-6. यह राजस्थान की एकमात्र झील है जिसका जल सर्दियों में जम जाता है।

No.-7. इस झील के किनारे नन रॉक, टॉड रॉक व नंदी रॉक चट्टानें स्थित है।

No.-8. टॉड रॉक की आकृति मेंढ़क के समान, नन रॉक की आकृति महिला के धुंघट के समान तथा नंदी रॉक की आकृति बैल/शिव के नांदिया/साण्ड जैसे आकार की बनी हुई है।

सुखना झील

No.-1. भारत के चण्डीगढ़ नगर में हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित एक सरोवर है।

No.-2. यह झील 1958 में 3 किमी² क्षेत्र में बरसाती झील सुखना खाड (चोअ) को बाँध कर बनाई गई थी। पहले इसमें सीधा बरसाती पानी गिरता था और इस कारण बहुत सी गार इसमें जमा हो जाती थी।

No.-3. इसको रोकने के लिए 25.42 किमी² ज़मीन ग्रहण करके उसमे जंगल लगाया गया।

No.-4. 1974 में इसमें चोअ के पानी को दूसरी तरफ मोड़ दिया गया और झील में साफ़ पानी भरने का प्रबंध कर लिया गया।

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