Bharat Ke Vayasray pdf in Hindi

Bharat Ke Vayasray pdf in Hindi

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वायसराय’ शब्द ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार में ‘1858 के भारत सरकार अधिनियम’ के माध्यम से पेश किया गया था। इस संशोधन का प्रमुख कारण 1857 का सिपाही विद्रोह था, जिसे ‘भारतीय स्वतंत्रता के प्रथम युद्ध’ के रूप में जाना जाता है। भारत के पहले वायसराय लॉर्ड कैनिंग थे जिन्होंने 1862 तक वायसराय के रूप में कार्य किया। भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन थे, जिन्होंने 1947 से 1948 तक इस पद पर कार्य किया। इस प्रकार, भारत में वायसराय

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लॉर्ड मिन्टों द्वितीय

No.-1. कार्यकाल – 18 नवम्बर 1905 – 23 नवम्बर 1910

No.-2. लॉर्ड मिंटो के कार्यकाल में 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई।

No.-3. इसके कार्यकाल में 1906 में कांग्रेस का सूरत का अधिवेशन हुआ जिसमें कांग्रेस का विभाजन हो गया, जिसका 1916 के लखनऊ अधिवेशन में पुनः एकीकरण हुआ।

No.-4. लॉर्ड मिण्टो के समय में मॉर्ले-मिंटो सुधार अधिनियम (Morley-Minto Reforms, 1909 ई.) पारित हुआ, जिसमे सरकार में भारतीय प्रतिनिधित्व में मामूली बढ़ोत्तरी हुई और हिन्दुओं और मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचक मण्डल बनाया गया।

No.-5. इसके कार्यकाल में खुदीराम बोस को फांसी दे दी गयी, जिसने प्रफुल्लकुमार चाकी के साथ मिलकर कलकत्ता के मॅजिस्ट्रेट किंग्जफोर्ड की बग्घी पर बम फेंका था।

No.-6. मिंटो के ही कार्यकाल 1908 में बालगंगाधर तिलक को 6 वर्ष की सजा सुनाई गयी थी, क्योंकि तिलक ने क्रान्तिकारी प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस के बम हमले का समर्थन किया था, और इन्हें बर्मा की जेल में भेज दिया गया।

No.-7. लॉर्ड मिंटो के समय में अंग्रेजों ने बांटो और राज करो की नीति औपचारिक रूप से अपनाली थी।

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय

No.-1. कार्यकाल – 23 नवम्बर 1910 – 4 अप्रैल 1916

No.-2. लॉर्ड हार्डिंग के समय सन 1911 में जॉर्ज पंचम के आगमन पर दिल्ली दरबार का आयोजन किया गया, साथ ही बंगाल विभाजन को रद्द कर दिया गया।

No.-3. 1911 में ही बंगाल से अलग करके बिहार और उड़ीसा नाम से नए राज्यों का निर्माण हुआ।

No.-4. हार्डिंग के कार्यकाल में भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।

No.-5. हार्डिंग के समय में ही सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ, जिसके लिए वह भारत का समर्थन पाने में सफल रहा।

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No.-6. हार्डिंग के समय में 1913 में फ़िरोजशाह मेहता ने बाम्बे क्रानिकल एवं गणेश शंकर विद्यार्थी ने प्रताप का प्रकाशन किया।

No.-7. हार्डिंग के कार्यकाल में तिलक ने अप्रैल 1915 में और एनी बेसेंट ने सितम्बर 1915 में होमरूल लीग की स्थापना की।

No.-8. 1916 ई. में पंडित महामना मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिन्दू की स्थापना की और लॉर्ड हार्डिंग को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का कुलपति भी नियुक्त किया गया।

लॉर्ड चेम्सफोर्ड

No.-1. कार्यकाल – 4 अप्रैल 1916

No.-2. इसके कार्यकाल में तिलक और एनी बेसेंट ने अपने होमरूल लीग के आन्दोलन की शुरुआत की।

No.-3. 1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग में एक समझौता हुआ जिसे लखनऊ पैक्ट के नाम से जाना जाता है।

No.-4. इसके समय में ही भारत में शौकत अली, मुहम्मद अली और मौलाना अबुल कलम आजाद द्वारा खिलाफत आन्दोलन की भी शुरुआत की गयी, जिसे बाद में गाँधी द्वारा चलाये गए असहयोग आन्दोलन का भी समर्थन भी मिला।

No.-5. 1920 में ही मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कालेज (सैयद अहमद खान द्वारा 1875 में स्थापित) अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना।

No.-6. चेम्सफोर्ड के कार्यकाल में, सर सिडनी रौलट की अध्यक्षता में एक कमेटी नियुक्त करके रौलेट एक्ट मार्च 1919 में पारित किया गया, जिससे मजिस्ट्रेटों को यह अधिकार मिल गया कि वह किसी भी संदेहास्पद स्थिति वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करके उस पर मुकदमा चला सकता था।

No.-7. चेम्सफोर्ड के समय में ही 1919 में जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड हुआ।

No.-8. इसके समय में भारत सरकार अधिनियम, 1919 ई. व मॉण्टेग्यू-चेम्सफ़ोर्ड सुधार (Montagu-Chelmsford reforms)  लाया गया।

No.-9. 1916 ई. में पूना में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना तथा 1917 ई. में शिक्षा पर सैडलर आयोग (Sadler Commission) की नियुक्ति लॉर्ड चेम्सफ़ोर्ड के समय में ही की गई।

लॉर्ड रीडिंग

No.-1. कार्यकाल – 2 अप्रैल 1921 – 3 अप्रैल 1926

No.-2. लॉर्ड रीडिंग के समय में गाँधी जी का भारतीय राजनीति में पूर्ण रूप से प्रवेश हो चुका था।

No.-3. लॉर्ड रीडिंग के कार्यकाल में 1919 का रौलेट एक्ट वापस ले लिया गया।

No.-4. रीडिंग के समय में ही केरल में 1921 में मोपला विद्रोह  हुआ, जो खिलाफत आन्दोलन का ही एक रूप था, जिसके नेता वरीयनकुन्नाथ कुंजअहमद हाजी, सीथी कोया थंगल और अली मुस्लियर थे।

No.-5. लॉर्ड रीडिंग के ही कार्यकाल में 5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा की घटना हुई, जिसकी वजह से गाँधी जी ने अपना असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया।

No.-6. लॉर्ड रीडिंग के समय में 1921 में प्रिन्स ऑफ़ वेल्स का भारत आगमन भी हुआ।

No.-7. लॉर्ड रीडिंग के कार्यकाल एम. एन. रॉय द्वारा दिसम्बर 1925 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का भी गठन किया गया।

No.-8. 1922 में चितरंजन दास, नरसिंह चिंतामन केलकर और मोतीलाल नेहरू ने मिलकर स्वराज पार्टी का गठन किया।

No.-9. लॉर्ड रीडिंग के कार्यकाल में दिल्ली और नागपुर विश्वविद्यालयों की भी स्थापना हुई।

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लॉर्ड इरविन

No.-1. कार्यकाल – 3 अप्रैल 1926 – 18 अप्रैल 1931

No.-2. इरविन के कार्यकाल के दौरान गाँधी जी ने 12 मार्च, 1930 ई. में सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत की।

No.-3. इरविन के कार्यकाल में 1919 ई. के गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट की समीक्षा करने के लिए, 1928 में साइमन कमीशन नियुक्त किया गया।

No.-4. साइमन कमीशन के अध्यक्ष सर जॉन साइमन थे, और इसके एक सदस्य क्लीमेंट एटली भी थे, जो बाद में इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बने, जिनके कार्यकाल में 1947 में भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्रता मिली।

No.-5. लॉर्ड इरविन के कार्यकाल में मोतीलाल नेहरु ने नेहरु रिपोर्ट पेश की, जिसमे भारत को अधिशसी राज्य का दर्जा देने की बात कही गयी।

No.-6. कांग्रेस ने 1930 ई. में महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्याग्रह आन्दोलन शुरू किया और अपने कुछ अनुयायियों के साथ दांडी यात्रा करके नमक कानून तोडा।

No.-7. इरविन के समय में लंदन में ब्रिटिश सरकार और गाँधी जी के बीच प्रथम गोलमेज सम्मलेन हुआ।

No.-8. मार्च 1931 में गाँधी और इरविन के बीच गाँधी-इरविन समझौता  हुआ, जिसके बाद गाँधी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन वापस ले लिया।

No.-9. इरविन के कार्यकाल में 1929 में, पब्लिक सेफ्टी बिल और लाला लाजपत रॉय की हत्या के विरोध में दिल्ली के असेम्बली हॉल में भगत सिंह और उनके साथियों ने बम फेंका।

No.-10. लॉर्ड इरविन के कार्यकाल में ही 1929 में प्रसिद्ध लाहौर षड्यंत्र एवं स्वतंत्रता सेनानी जतिनदास  की 64 दिन की भूख हड़ताल के बाद जेल में मृत्यु हो गयी थी।

No.-11. इरविन ने खनन और भू-विज्ञान के विकास के लिए इंडियन स्कूल ऑफ़ माइंस, धनबाद की स्थापना भी की।

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लॉर्ड विलिंगडन

No.-1. कार्यकाल – 18 अप्रैल 1931 – 18 अप्रैल 1936

No.-2. लॉर्ड विलिंगडन के कार्यकाल में 1931 में. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन और 1932 में तृतीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन लन्दन में हुआ।

No.-3. विलिंगडन के समय में 1932 में देहरादून में भारतीय सेना अकादमी की स्थापना की गयी| 1934 में गाँधी जी ने दोबारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया।

No.-4. 1935 में गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट पारित किया गया, एवं 1935 में ही बर्मा को भारत से अलग कर दिया गया।

No.-5. विलिंगडन के समय में ही भारतीय किसान सभा  की भी स्थापना की गयी।

No.-6. महात्मा गाँधी एवं अम्बेडकर के बीच 24 सितम्बर, 1932 ई. को पूना समझौता हुआ।

लॉर्ड लिनलिथगो

No.-1. कार्यकाल – 18 अप्रैल 1936 – 1 अक्टूबर 1943

No.-2. 1939 में सुभाष चन्द्र बोस ने कांग्रेस छोड़कर फॉरवर्ड ब्लाक नाम की अलग पार्टी का गठन कर लिया।

No.-3. लॉर्ड लिनलिथगो के समय में ही पहली बार मुस्लिम लीग द्वारा 1940 में पाकिस्तान की मांग  की गयी।

No.-4. 1942 ई. में क्रिप्स मिशन भारत आया।

No.-5. 1940 में कांग्रेस ने व्यक्तिगत असहयोग आन्दोलन प्रारंभ किया।

No.-6. लॉर्ड लिनलिथगो के कार्यकाल में गाँधी जी ने करो या मरो का नारा देते हुए भारत छोड़ो आन्दोलन  की शुरुआत की।

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लॉर्ड वेवेल

No.-1. कार्यकाल – 1 अक्टूबर 1943 – 21 फ़रवरी 1947

No.-2. 1945 में लॉर्ड वेवेल ने शिमला में एक समझौते का आयोजन किया, जिसे शिमला समझौता या वेवेल प्लान के नाम से जाना गया।

No.-3. वेवेल के समय में 1946 में नौसेना का विद्रोह हुआ था।

No.-4. 1946 में अंतरिम सरकार का गठन किया गया।

No.-5. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने 20 फरवरी, 1947 को भारत को स्वतंत्र करने की घोषणा कर दी।

लॉर्ड माउंटबेटेन

No.-1. कार्यकाल – 21 फ़रवरी 1947 – 15 अगस्त 1947

No.-2. लॉर्ड माउंटबेटन भारत का अंतिम वायसराय था।

No.-3. लॉर्ड माउंटबेटन ने 3 जून, 1947 को भारत के विभाजन की घोषणा की।

No.-4. 4 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम प्रस्तुत किया गया, जिसे 18 जुलाई, 1947 को पारित करके भारत की स्वतंत्रता की घोषणा कर दी गयी।

No.-5. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम द्वारा भारत को विभाजन करके भारत और पाकिस्तान नाम के दो राज्यों में बाँट दिया गया।

No.-6. 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र हो गया।

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

No.-1. कार्यकाल – 15 अगस्त 1947 – 1948

No.-2. भारत की स्वतंत्रता के बाद 1948 में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को स्वतंत्र भारत का प्रथम गवर्नर जनरल नियुक्त किया गया।

गवर्नर जनरल के अधिकार और कर्तव्य

No.-1. 1773 ई. के रेगुलेटिंग एक्ट में गवर्नर-जनरल के अधिकारों और कर्तव्यों का विवरण दिया हुआ है।

No.-2. बाद में पिट के इंडिया एक्ट (1784) तथा पूरक एक्ट (1786) के अनुसार इस अधिकारों और कर्तव्यों को बढ़ाया गया।

No.-3. गवर्नर-जनरल अपनी कौंसिल (परिषद्) की सलाह एवं सहायता से शासन करता था, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर वह परिषद की राय की उपेक्षा भी कर सकता था।

No.-4. इस व्यवस्था से गवर्नर-जनरल व्यवहारत: भारत का भाग्य-विधाता होता था।

No.-5. केवल सुदूर स्थित ब्रिटेन की संसद और भारतमंत्री ही उस पर नियंत्रण रख सकते थे।

स्वाधीन भारत में गवर्नर-जनरल

No.-1. भारत के स्वाधीन होने पर श्री राजगोपालाचार्य गवर्नर-जनरल के पद पर 25 जनवरी, 1950 तक रहे।

No.-2. उसके बाद 26 जनवरी, 1950 को भारत के गणतंत्र बन जाने पर गवर्नर-जनरल का पद समाप्त कर दिया गया।

No.-3. लॉर्ड विलियम बैंटिक बंगाल में फ़ोर्ट विलियम का अन्तिम गवर्नर-जनरल था।

No.-4. वहीं फिर 1833 ई. के चार्टर एक्ट के अनुसार भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल बना।

No.-5. लॉर्ड कैनिंग 1858 के भारतीय शासन विधान के अनुसार प्रथम वाइसराय था, तथा लॉर्ड लिनलिथगो अन्तिम वाइसराय था।

No.-6. लॉर्ड माउण्टबेटन हिन्दुस्तान में सम्राट का अन्तिम प्रतिनिधि था

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