Bharat Ke Pramukh Udyog pdf- भारत के प्रमुख उद्योग

Bharat Ke Pramukh Udyog pdf- भारत के प्रमुख उद्योग

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Industry of India [भारत के उद्योग] is very important topic of Geography of India (भारत का भूगोल) in the exam point of view. We are going to share the set of  Questions in this post. Complete the all practice set of this topic . GK questions of this post “भारत के उद्योग उद्योग:

Bharat Ke Pramukh Udyog pdf- भारत के प्रमुख उद्योग

No.-1. किसी विशेष क्षेत्र में भारी मात्रा में सामान का निर्माण/उत्पादन या वृहद रूप से सेवा प्रदान करने के मानवीय कर्म को उद्योग (Industry) कहते हैं।

No.-2. उद्योगों के कारण गुणवत्ता वाले उत्पाद सस्ते दामों पर प्राप्त होते हैं।

No.-3. इससे लोगों का रहन-सहन के स्तर में सुधार होता है और जीवन सुविधाजनक होता चला जाता है।

No.-4. औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका में नये-नये उद्योग-धन्धे आरम्भ हुए।

No.-5. इसके बाद आधुनिक औद्योगीकरण ने पैर पसारना अरम्भ किया।

No.-6. इस काल में नयी-नयी तकनीकें एवं उर्जा के नये साधनों के आगमन ने उद्योगों को जबर्दस्त बढावा दिया।

उद्योगों के दो मुख्य पक्ष हैं:

No.-1भारी मात्रा में उत्पादन – उद्योगों में मानक डिजाइन के उत्पाद भारी मात्रा में उत्पन्न किये जाते हैं।

No.-2. इसके लिये स्वतचालित मशीनें एवं असेम्बली-लाइन आदि का प्रयोग किया जाता है।

No.-3. कार्य का विभाजन – उद्योगों में डिजाइन, उत्पादन, मार्कटिंग, प्रबन्धन आदि कार्य अलग-अलग लोगों या समूहों द्वारा किये जाते हैं।

No.-4. जबकि परम्परागत कारीगर द्वारा निर्माण में एक ही व्यक्ति सब कुछ करता था/है।

No.-5. इतना ही नहीं, एक ही काम (जैसे उत्पादन) को छोटे-छोटे अनेक कार्यों में बांट दिया जाता है।

स्वतंत्रता के पूर्व स्थापित लोहा इस्पात कारखाना

भारतीय लोहा इस्पात कंपनी –

No.-1. इसकी स्थापना 1918 ई. में पश्चिम बंगाल की दामोदर नदी घाटी में हीरापुर (बाद में इसे बर्नपुर कहा गया) नामक स्थान पर की गई थी।

No.-2. यहां 1922 ई. से उत्पादन शुरू हुआ आगे चलकर कुल्टी, बर्नपुर तथा हीरापुर स्थित संयंत्रों को इसमें मिला दिया गया।

मैसूर आयरन एंड स्टील वर्क्स –

No.-1. 1923 ईस्वी में मैसूर राज्य (वर्तमान कर्नाटक) के भद्रावती नामक स्थान पर स्थापित की गई थी इसका वर्तमान नाम विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड है।

स्टील कॉरपोरेशन ऑफ बंगाल –

No.-1. इसकी स्थापना 1937 बर्नपुर (पश्चिम बंगाल) में की गई थी।

No.-2. बाद में 1953 ई. में इसे भारतीय लौह-इस्पात कंपनी में मिला दिया गया था।

स्वतंत्रता के पश्चात स्थापित लौह इस्पात कारखाना –

No.-1. दूसरी पंचवर्षीय योजना काल 1956-61 में स्थापित कारखाना

भिलाई इस्पात संयंत्र

No.-1. इसकी स्थापना 1955 ई. में तत्कालीन मध्य प्रदेश के भिलाई (दुर्ग जिला, छत्तीसगढ़) में पूर्व सोवियत संघ की सहायता से की गई थी।

Bharat Ke Pramukh Udyog 

हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड, दुर्गापुर

No.-1. इसकी स्थापना 1956 ईस्वी. में पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर नामक स्थान पर ब्रिटेन की सहायता से की गई थी।

No.-2. तृतीय पंचवर्षीय  योजना काल में स्थापित कारखाना

बोकारो स्टील प्लांट

No.-1. इसकी स्थापना 1968 में तत्कालीन बिहार राज्य (अब झारखण्ड) के बोकारो नामक स्थान पर पूर्व सोवियत संघ की सहायता से की गई थी।

कोयला उद्योग

No.-1. कोयले का महत्त्वः भारतीय कोयला उद्योग एक आधारभूत उद्योग है।

No.-2. इस पर अन्य उद्योगों का विकास निर्भर करता है।

No.-3. वर्तमान समय में शक्ति के साधन के रूप में कोयला उद्योग का महत्त्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।

No.-4. पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश गोंडवाना कोयला क्षेत्र है।

No.-5. भारत में प्राप्त कुल कोयले का 98% भाग गोंडवाना क्षेत्र से ही प्राप्त होता है।

No.-6. इस क्षेत्र से एन्थ्रेसाइट और बिटुमिनस किस्म के कोयले प्राप्त होते हैं।

No.-7. जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, तमिलनाडु, असम, मेघालय और उत्तर प्रदेश टर्शियरी कोयला क्षेत्र है।

No.-8. भारत में प्राप्त कुल कोयले का 2% भाग टर्शियरी कोयला क्षेत्र से प्राप्त होता है।

भारत के प्रमुख कोयला क्षेत्र

No.-1. रानीगंज, झरिया, पू- और पश्चिम बोकारो, तवाघाटी, जलचर, चन्द्रान्वर्धा और गोदावरी की घाठी।

No.-2. वर्तमान समय में भारतीय कोलया उद्योग का संचालन एवं नियंत्रण सार्वजनिक क्षेत्र की दो प्रमुख संस्थाएं करती हैं:

No.-3. कोल इंडिया लि. (Coal India Ltd.—CIL)

No.-4. कोयले के कुल उत्पादन के लगभग 86% भाग पर नियंत्रण यह एक धारक कम्पनी है।

Bharat Ke Pramukh Udyog – भारत के प्रमुख उद्योग

 

पेट्रोलियम उद्योग

No.-1. पेट्रोलियम उद्योग का महत्त्व: भारत में पेट्रोलियम उद्योग का महत्त्व उसकी मांग एवं पूर्ति से लगाया जा सकता है।

No.-2. देश में कच्चे तेल का कुल भंडार 75.6 करोड़ टन अनुमानित है।

No.-3. परंतु फिर भी भारत अपनी कुल आवश्यकता का मात्र 20% भाग ही स्वदेशी उत्पादन द्वारा प्राप्त कर पाता है।

No.-4. वर्ष 1956 तक भारत में केवल एक ही खनिज तेल उत्पादन क्षेत्र विकसित थी जो डिग्बोई असम में था।

No.-5. डिग्बोई के जिस तेल कुएं से तेल निकाला गया था वहां से आज भी तेल निकाला जा रहा है।

No.-6. वर्तमान में भारत असम, त्रिपुरा, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, मुम्बई, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, केरल के तटीय प्रदेशों तथा अंडमान एवं निकोबार से खनिज तेल प्राप्त करने का कार्य कर रहा है।

No.-7. भारत में तेल की खोज और इसके उत्पादन का काम व्यापक और व्यवस्थित रूप से 1956 में तेल और प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) के स्थापना के बाद प्रारंभ हुआ।

No.-8. इसी क्रम में ऑयल इंडिया लि. (OIL) सार्वजनिक क्षेत्र की दूसरी कम्पनी बन गई।

भारत की नवीनतम तेल परिशोधनशाला:

बीना ऑयल रिफाइनरी

No.-1. मध्य प्रदेश के सागर जिले में 20 मई, 2011 को प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा इसका उदघाटन हुआ।

No.-2. यह भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लि- (BPCI) व ओमान ऑयल कम्पनी (BOL) का संयुक्त उपक्रम है।

No.-3. इसमें 1% हिस्सेदारी MP Govt. की, 26% हिस्सेदारी ओमान ऑयल कम्पनी तथा शेष 73% हिस्सेदारी भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लि- की है।

No.-4. वर्ष 2015–16 में इस रिफाइनरी की क्षमता 150 लाख टन करने की योजना है।

गुरू गोविन्द सिंह रिफाइनरीः

No.-1. पंजाब के भटिंडा में स्थित इस रिफाइनरी का उदघाटन 28 अप्रैल, 2012 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया।

No.-2. यह सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लि- (HPCL) तथा लक्ष्मी निवास मित्तल की मित्तल एनर्जी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लि- का संयुक्त उपक्रम है।

No.-3. इस रिफाइनरी के प्रारंभ होने से भारत में कुल तेलशोधन क्षमता 213 मिलियन मीट्रिक टन सलाना हो गया है।

No.-4. ONGC द्वारा 3 रिफायनरियां स्थापित करने की योजना है—(1) मंगलौर (कर्नाटक), (2) काकीनाड़ा (आंध्र प्रदेश) और (3) बाड़मेर (राजस्थान)।

No.-5. IOC द्वारा 2 रिफायनरियां स्थापित करने की योजना है—(1) एन्नोर (तमिलनाडु) और (2) पाराद्वीप में।

एल्युमीनियम उद्योग –

No.-1. भारत में एलुमिनियम का पहला कारखाना 1937 में पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निकट जेके नगर में स्थापित किया गया था।

No.-2. 1938 में 4 कारखाने, तत्कालीन बिहार राज्य के मुरी, केरल के अंल्वाय, पश्चिम बंगाल के वेल्लूर तथा उड़ीसा के हीराकुंड में स्थापित किए गए।

No.-3. हिंदुस्तान एलुमिनियम कॉरपोरेशन (हिंडालको) की स्थापना तत्कालीन मध्य प्रदेश के कोरबा नामक स्थान पर की गई।

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No.-4. मद्रास एलुमिनियम कंपनी लिमिटेड तमिलनाडु के मैटूर में स्थापित की गई

No.-5. एल्युमिनियम उत्पादन करने में भारत का विश्व में आठवां स्थान है।

No.-6. नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO), देश का सबसे बड़े समन्वित, एलुमिनियम संयंत्र परिसर का गठन 7 जनवरी 1981 को किया गया था।

No.-7. इसका पंजीकृत कार्यालय भुवनेश्वर (ओडिशा) में है।

सूती वस्त्र उद्योग:

No.-1. आधुनिक ढंग से सूती वस्त्र की पहली मिल की स्थापना 1818 में कोलकाता के समीप फोर्ट ग्लास्टर में की गई थी। किंतु यह असफल रही थी।

No.-2. सबसे पहला सफल आधुनिक सूती कपड़ा कारखाना 1854   में मुंबई में कवासजी डावर द्वारा खोला गया।

No.-3. इसमें 1856 ई. से उत्पादन प्रारंभ हुआ।

No.-4. सूती वस्त्र उद्योग का सर्वाधिक केंद्रीकरण महाराष्ट्र एवं गुजरात राज्य में है।

No.-5. अन्य प्रमुख राज्य हैं – पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल व उत्तर प्रदेश।

Bhart Ke Pramukh Udyog pdf- भारत के प्रमुख उद्योग

No.-6. मुंबई को भारत के सूती वस्त्रों की राजधानी के उपनाम से जाना जाता है।

No.-7. कानपुर को उत्तर भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।

No.-8. कोयंबटूर को दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।

No.-9. अहमदाबाद को भारत का बोस्टन कहा जाता है।

No.-10. भारतीय अर्थव्यवस्था में कपड़ा उद्योग का स्थान कृषि के बाद दूसरा है।

No.-11. यह भारत का सबसे प्राचीन उद्योग है।

No.-12. यह देश का सबसे बड़ा संगठित एवं व्यापक उद्योग है।

No.-13. यह उद्योग देश में कृषि के बाद रोजगार प्रदान करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है।

No.-14. उद्योग उत्पादन में वस्त्र उद्योग का योगदान 14% है।

No.-15. देश के सकल घरेलू उत्पाद में यह उद्योग 4% तथा देश की निर्यात आय में 11% योगदान है।

No.-16. रोजगार प्रदान करने की दृष्टि से कृषि के बाद वस्त्र उद्योग दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है।

 

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