Bharat Ke Pramukh Udyog - भारत के प्रमुख उद्योग

Bharat Ke Pramukh Udyog – भारत के प्रमुख उद्योग

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Bharat Ke Pramukh Udyog – भारत के प्रमुख उद्योग

जूट उद्योग

No.-1. सोने का रेशा के नाम से मशहूर जूट के रेशों से सामानों का निर्माण करने में भारत का विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त है।

No.-2. इसका पहला कारखाना कोलकाता के समीप रिशरा नामक स्थान पर 1869 में खोला गाया था।

No.-3. भारतीय जूट निगम की स्थापना 1971 मेंजूट के आयात, निर्यात तथा आंतरिक बाजार की देखभाल करने के लिए की गई थी।

No.-4. भारत विश्व के 35% जूट के सामानों का निर्माण करता है और दूसरा बड़ा निर्यातक राष्ट्र है।

जूट उद्योग से सबंधित प्रमुख स्थान:

No.-1. पश्चिम बंगाल     टीटागढ़, रिशरा, बाली, अगरपाड़ा, बाँसबेरिया, कान किनारा, उलबेरिया, सीरामपुर, बजबज, हावड़ा, श्यामनगर एंव शिवपुर

No.-2. आंध्रा प्रदेश          विशाखापत्तनम, गुण्टूर

No.-3. उत्तर प्रदेश          कानपूर, सहजनवां (गोरखपुर)

No.-4. बिहार    पूर्णिया, कटिहार, सहरसा एंव दरबंगा

No.-. 5अंतरराष्ट्रीय जूट संगठन की स्थापना 1984 में हुई थी।

No.-6. इसका मुख्यालय बांग्लादेश के ढाका में है।

चीनी उद्योग

No.-1. भारत में आधुनिक चीनी उद्योग की शुरुआत 1930 में बिहार में पहली चीनी मिल की स्थापना के साथ हुई।

No.-2. उत्तर प्रदेश          देवरिया,भटनी, पडरौना, गोरखपुर, गौरी बाजार, सिसवां बाजार, बस्ती, बलरामपपुर, गोंडा, बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, विजनौर, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर, कानपूर, फ़ैजाबाद एंव मुज्जफरनगर।

No.-3. बिहार    मोतिहारी, सुगौली, मझोलिया, चनपटिया, नरकटियागंज, मण्डौर, सासामुसा, मोतीपुर, गोपालगंज, डालमियानगर एंव दरभंगा।

No.-4. महाराष्ट्र            मनसद, नासिक, अहमदनगर, पूना, शोलापुर एंव कोल्हापुर।

No.-5. पश्चिम बंगाल     तेलडांगा, पलासी, हावड़ा एंव मुर्शिदाबाद।

Bharat Ke Pramukh Udyog 

सीमेंट उद्योग

No.-1. विश्व में सबसे पहले आधुनिक रूप से सीमेंट का निर्माण 1824 में ब्रिटेन के पोर्टलैंड नामक स्थान पर किया गया था।

No.-2. सीमेन्ट उद्योग का प्रारंभ से अब तक की स्थितिः वर्ष 1904 में सर्वप्रथम मद्रास (अब चेन्नई) में भारत का पहला सीमेन्ट कारखाना खोला गया जो असफल रहा किंतु 1912–14 के मध्य 3 बड़े सीमेन्ट कारखाने खोले गएः

No.-3. पोरबंदर (गुजरात)।

No.-4. कटनी (मध्य प्रदेश)।

लाखेरी

No.-1. मद्रास के कारखाने के बाद 1912-13 की अवधि में इंडियन सीमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर कारखाने की स्थापना की गई।

No.-2. इसमें 1914 से उत्पादन प्रारंभ हुआ।

No.-3. एसोसिएट सीमेंट कंपनी लिमिटेड की स्थापना 1936 में की गई थी।

No.-4. 1991 में घोषित औद्योगिक नीति के अन्तर्गत सीमेन्ट उद्योग को लाइसेन्स मुक्त कर दिया गया।

No.-5. मार्च, 2011 के अन्त में देश में 166 बड़े सीमेन्ट संयंत्र है इसके अलावा देश में कुल 350 लघु सीमेन्ट संयंत्र भी है।

No.-6. वर्ष 2010–11 में सीमेन्ट और ईंट का निर्यात 40 लाख टन रहा।

No.-7. भारतीय सीमेन्ट ने बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, नेपाल, मध्य पूर्व एशिया (Middle East Asia), म्यांमार, अफ्रीका, आदि देशों के बाजार में अपनी पहुंच बना ली है।

No.-8. भारत की सीमेन्ट कम्पनियां हैं: बिरला सीमेन्ट, जे-पी- सीमेन्ट, एसीसी सीमेन्ट और बांगर सीमेन्ट।

कागज उद्योग

No.-1. कागज का पहला सफल कारखाना 1879 में लखनऊ में लगाया गया।

No.-2. मध्यप्रदेश के नेपानगर में अखबारी कागज तथा होशंगाबाद में नोट छापने के कागज बनाने का सरकारी कारखाना है।

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रासायनिक उर्वरक उद्योग

No.-1. ऐतिहासिक रूप से देश में सुपर फास्फेट उर्वरक का पहला कारखाना 1996 में तमिलनाडु के रानीपेट नामक स्थान पर स्थापित किया गया था।

No.-2. 1944 में कर्नाटक के बैलेगुला नामक स्थान पर मैसूर केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स के नाम से अमोनिया उर्वरक का कारखाना लगाया गया।

No.-3. 1947 में अमोनिया सल्फेट का पहला कारखाना केरल के अलवाय नामक स्थान पर खोला गया।

No.-4. भारतीय उर्वरक निगम की स्थापना 1951 में की गई।

No.-5. इसके तहत एशिया का सबसे बड़ा उर्वरक संयंत्र सिंदरी में स्थापित किया गया।

No.-6. भारत पोटाश उर्वरक के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है।

No.-7. भारत में नाइट्रोजन उर्वरक की खपत सबसे अधिक है।

No.-8. भारत में 2010 11 में NPK उर्वरकों की प्रति हेक्टेयर खपत 140.14 किग्रा थी।

No.-9. भारत में प्रति हेक्टेयर पूर्वक खपत में प्रथम स्थान पंजाब का है और दूसरा एवं तीसरा स्थान क्रमश: आंध्रप्रदेश तथा हरियाणा का है।

No.-10. कोक आधारित उर्वरक इकाइयां तालचर (उड़ीसा), रामागुंडम (आंध्रप्रदेश) तथा कोरबा (छत्तीसगढ़) में अवस्थित है।

No.-11. क्रभको का गैस आधारित यूरिया-अमोनिया सयंत्र हजीरा (गुजरात) में है।

No.-12. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर तथा जगदीशपुर के कारखाना भी गैस आधारित है।

जलयान निर्माण उद्योग:

No.-1. भारत में जलयान निर्माण का प्रथम कारखाना 1941 ई. में सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी द्वारा विशाखापट्टनम में स्थापित किया गया था।

No.-2. 1952 में भारत सरकार द्वारा इसका अधिग्रहण करके हिंदुस्तान शिपयार्ड विशाखापट्टनम नाम दिया गया था।

दवा निर्मण उद्योग

No.-1. प्रमुख स्थान  –  मुंबई, दिल्ली, कानपूर, हरिद्वार, ऋषिकेश, अहमदाबाद, पुणे, मथुरा एंव हैदराबाद।

शीशा उद्योग

No.-1. भारत में शीशा उद्योग का केन्द्रीकरण रेन की सुविधा वाले स्थानों में देखने को मिलता है।

No.-2. इस उद्योग का विकास मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व तमिलनाडु राज्य में हुआ है।

रेल उपकरण उद्योग

No.-1. चित्तरंजन (पश्चिम बंगाल) रेल इंजन बनाने का सबसे पुराना कारखाना है।

No.-2. इसकी स्थापना 26 जनवरी 1950 के दिन चित्तरंजन लोकोमेटिव वर्क्स  नाम से शुरू हुई।

No.-3. वर्तमान  यहां विधुत इंजन का निर्माण किया जा रहा है।

No.-4. डीज़ल से चलने वाले इंजन निर्माण वाराणसी में होता ही।

No.-5. रेलवे इंजन का निर्मण कार्य जमशेदपुर (झारखण्ड) में भी किया जाता है।

No.-6. रेल के डिब्बे बनाने  प्रमुख केंद्र चेन्नई के समीप पेरंबूर नामक स्थान पर 1952 में स्थापित किया गया और इसने उत्पादन की शुरुआत 2 अक्टूबर 1955 से हुई इसके अन्य प्रमुख केंद्र बेंगलुरु तथा कोलकाता में है।

Bhart Ke Pramukh Udyog – भारत के प्रमुख उद्योग

No.-7. पंजाब के कपूरथला में इंट्री कल कोच फैक्ट्री की स्थापना की गई है।

No.-8. रायबरेली उत्तर प्रदेश कचरापारा पश्चिम बंगाल में रेलवे कोच फैक्ट्री की नई उत्पादन इकाइयां लगाई गई है।

No.-9. केरल के पाला कार्ड में भी रेल कोच फैक्ट्री लगाई जा रही है।

No.-10. बिहार के मंडोरा में डीजल इंजन में मधेपुरा में विद्युत इंजन कारखाना लगाया जा रहा है।

No.-11. छपरा बिहार में रेल वहीं फैक्ट्री स्थापित की गई है।

No.-12. पश्चिम बंगाल के धनकुनी में विद्युत व डीजल इंजन के अवयव बनाने की फैक्ट्री लगाई जा रही है

No.-13. आईआईटी रुड़की मैं देश के पहले रेलवे इंजन थॉमसन को सुरक्षित किया गया है।

No.-14. ऊनी वस्त्र उद्योग भारत में उन्नी वस्त्र की पहली मेल 18 क्षेत्र में कानपुर में स्थापित की गई परंतु इस उद्योग का वास्तविक विकास 1950 के बाद ही हुआ।

No.-15. पंजाब में लुधियाना जालंधर धारीवाल अमृतसर इस दोगे महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

No.-16. ब्रिटेन अमेरिका कनाडा जर्मनी आदि भारतीय कालीनों के महत्वपूर्ण आयातक हैं।

बिजली के सामान

No.-1. भोपाल, हरिद्वार, रामचंद्रपुरम, हैदराबाद, तिरुचिरापल्ली तथा कोलकाता बिजली के सामान बनाने के महत्वपूर्ण केंद्र हैं

टेलीफोन उद्योग

No.-1. बंगलुरु तथा रूपनारायणपुर टेलीफोन उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्र है।

रेशम उद्योग

No.-1. भारत एक ऐसा देश है जहां शहतूती, एरी, तसर एवं मूंगा सभी 4 किस्मों की रेशम का उत्पादन होता है।

No.-2. मूंगा रेशम उत्पादन में भारत को एकाधिकार प्राप्त है।

No.-3. कर्नाटक देश का 41% से अधिक कच्चा रेशम उत्पादन करता है।

No.-4. यहां शाहतूती रेशम बनाया जाता है।

No.-5. यह देश का 56% रेशमी धागा बनाया जाता है।

No.-6. भारत में कुल कपड़ा निर्यात में रेशमी वस्त्रों का योगदान लगभग 3% है।

No.-7. गैर शहतुती रेशम मुख्य असम बिहार और मध्य प्रदेश से प्राप्त होता है।

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चर्म उद्योग

No.-8. भारत में चर्म उद्योग के मुख्य केंद्र कानपुर, आगरा, मुंबई, कोलकाता, पटना तथा  बेंगलुरु में है।

No.-9. कानपुर चर्म उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है।

No.-10. यह जूते बनाने के लिए प्रसिद्ध है।

उद्योगों से सबंधित कुछ परिभाषाएँ –

No.-1. कृषि पर आधारित उद्योग : जो उद्योग कृषि उत्पादों को औद्योगिक उत्पादों में परिवर्तित करता है

No.-2. आधारभूत उद्योग : ये भारी उद्योग हैं जो अन्य उद्योगों के लिए आधारभूत हैं।जैसे-लोहा तथा इस्पात उद्योग।

No.-3. सहकारी उद्योग : ये उद्योग लोगों के समूह द्वारा व्यवस्थित किए जाते हैं जो कि कच्चे माल के उत्पादक होने के साथ-साथ एक दूसरे के सहयोग से उद्योगों को चलाने में भी मदद करते हैं।

No.-4. उपभोक्ता उद्योग : ये उद्योग प्रमुख रूप से लोगों के उपभोग के लिए वस्तुएँ प्रदान करते हैं।

No.-5. कुटीर उद्योग : ये उद्योग घरों या गाँवों में छोटे पैमाने पर चलाए जाते हैं।

No.-6. भारी उद्योग : ये उद्योग भारी कच्चे माल का प्रयोग कर भारी तैयार माल का निर्माण करते है। जैसे : लोहा और इस्पात उद्योग।

No.-7. उद्योग : कारखाने की उत्पादन क्रिया के द्वारा कच्चे माल के मूल्य में वृद्धि को उद्योग कहते हैं

No.-8. संयुक्त उद्योग : वे उद्योग जो राज्य सरकार तथा निजी क्षेत्रा के संयुक्त प्रयास से चलाए जाते हैं।

No.-9. हल्के उद्योग : ये उद्योग कम भार वाले कच्चे माल का प्रयोग कर हल्के तैयार माल का उत्पादन करते हैं। जैसे- इलेक्ट्रॉनिक्स, पंखे आदि।

No.-10. बड़े पैमाने के उद्योग : हर इकार्इ में बड़ी संख्या में लोगों को राजगार देने तथा उत्पादन स्तर में वृद्धि करने वाले उद्योग। जैसे जूट या पटसन उद्योग।

No.-11. खनिज आधारित उद्योग : जो उद्योग खनिज उत्पादों को तैयार माल में परिवर्तित करते हैं।

No.-

No.-12. सार्वजनिक क्षेत्रा के उद्योग : इन उद्योगों का स्वामित्व केन्द्र तथा राज्य दोनों सरकारों के पास होता है। जैसे- बी.एच.र्इ.एल., एच.र्इ.सी. तथा एन.टी.पी.सी.।

No.-13. प्राथमिक उद्योग : ये कच्चे माल के उत्पादन के उद्योग हैं।

No.-14. निजी क्षेत्रा के उद्योग : इन उद्योगों का स्वामित्व तथा नियंत्राण एक व्यक्ति, फर्म या कंपनी के हाथ में होता है।

No.-15. द्वितीयक उद्योग : ये उद्योग प्राथमिक उद्योगों द्वारा तैयार किए माल का प्रयोग करके वस्तुओं का निर्माण करते हैं।

No.-16. छोटे पैमाने के उद्योग : कम संख्या में लोगों को रोजगार देना तथा लगभग दो करोड़ पूँजी निवेश करने वाले द्योग जैसे-सिले-सिलाए वस्त्रों का उद्योग।

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