Amir khusrow ka  jiwan parichy aur racnayen

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Amir Khusro | अमीर खुसरो का जीवन परिचय : अमीर खुसरो का जन्म 1253 ई में उत्तर प्रदेश के एटा जिले के पटियाली गांव में हुआ था और उनकी मृत्यु 1325 ईस्वी में हुई। इनका वास्तविक नाम यमीनुद्दीन अबुल हसन था। उनका परिवार कई पीढ़ियों से राज दरबार से संबंधित था। अमीर खुसरो ने 7 मुसलमानों का समय देखा है।

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अमीर खुसरो की रचनाएँ

No.-1. अमीर खुसरो ने कई रचना की है जिनमें से निम्नलिखित प्रमुख हैं, जो प्रतीयोगीता परीक्षाओं में अक्सर पुछे जाते हैं-खालिकबारी,  खुसरो की पहेलियाँ, मुकरिया, श्रृंगारी, दो सुखने, गज़ल, ख़याल, कव्वाली, रुबाई आदि।

अमीर खुसरो के अन्य ग्रंथ

No.-1. अमीर खसरो ने उपर्युक्त ग्रंथों के अलावा कई और ग्रंथों की भी रचना की है जो इस प्रकार हैं-

No.-2. किरान-उल-सदामन, मिफताह-उल-फुतुल, खजाइन-उल-फुतुह (तारीख-ए-इलाही), देवल-रानी-खिज्रखाँ (आशिका), नुह–सिपहर, तुगलकनामा, आईने-ए-सिकन्दरी, एजाज-ए-खुसरबी, मजनू-लैला, शीरीन-खुसरो, हश्न-बिहश्त, तारीख-ए-दिल्ली, मतला-उल-अनवर, अफजल-वा-कवायद

अमीर खुसरो से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य

No.-1. आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार खुसरो ने संवत 1340 के आस-पास (1283 ई.) रचना करना आरंभ किया।

No.-2. अमीर खुसरो की पहेलियों और मुकरियों में ‘उक्तिवैचित्र्य’ की प्रधानता है।

No.-3. खालिकबारी तुर्की, अरबी-फारसी तथा  हिन्दी भाषाओं का पर्यायवाची शब्दकोश है।

No.-4. खुसरो प्रसिद्ध संगीतज्ञ भी थे उन्होंने ही मृदंग को काट कर तबला बनाया, सितार में सुधार किया। कहीं-कहीं मिलता है की पखावज के दो टुकड़े करके तबले का आविष्कार किया।

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अमीर ख़ुसरो की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

No.-1. ऐ री सखी मोरे पिया घर आए           बहुत कठिन है डगर पनघट की

No.-2. मेरे महबूब के घर रंग है री आ घिर आई दई मारी घटा कारी

No.-3. छाप तिलक सब छीन्हीं रे ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल

No.-4. जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्या        सकल बन फूल रही सरसों

No.-5. तोरी सूरत के बलिहारी, निजाम      अम्मा मेरे बाबा को भेजो री

No.-6. जब यार देखा नैन भर        बहोत रही बाबुल घर दुल्हन

No.-7. हजरत ख्वाजा संग खेलिए धमाल  बहुत दिन बीते पिया को देखे

No.-8. मोरा जोबना नवेलरा भयो है गुलाल                काहे को ब्याहे बिदेस

No.-9. दैया री मोहे भिजोया री शाह निजम के रंग में               जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए

 

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